अल्मोड़ा में नेशनल हाईवे का विस्तारीकरण यदि नगर के बीच से हुआ तो होगा व्यापक जन आंदोलन- बिट्टू कर्नाटक

जनहित में चौंसली कोसी एवं पांडे खोला चितई राष्ट्रीय राजमार्ग में बाई पास को मंजूर कर शासनादेश जारी करे सरकार


अल्मोड़ा-आज प्रेस को जारी एक बयान में उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवम पूर्व दर्जा मंत्री बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग में चौड़ीकरण के नाम पर यदि अल्मोड़ा की जनता के भवन,दुकानों आदि से खिलवाड़ करने की सोची गई तो न केवल इसका विरोध होगा बल्कि सरकार और संबंधित विभाग के खिलाफ एक बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।

चार बार स्वयं मिलकर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को इस संबंध में विस्तार से बता भी चुके

कर्नाटक ने कहा कि वे पूर्व में अनेकों बार ज्ञापनों के माध्यम से और चार बार स्वयं मिलकर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को इस संबंध में विस्तार से बता भी चुके है तथा केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी के द्वारा उन्हें आश्वासन भी दिया गया है कि अल्मोड़ा में नेशनल हाईवे का विस्तारीकरण शहर से न करके चौंसली कोसी मार्ग से किया जायेगा।

साथ ही पांडे खोला, शैल,एन.टी.डी., चितई आदि क्षेत्रों से जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग भी बाईपास बनाकर शहर से बाहर ही बाहर निकाला जाएगा, इसके बाद भी अभी तक इस संबंध में शासनादेश का जारी ना होना स्पष्ट प्रदर्शित करता है कि संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों पर अफसरशाही हावी है।

अल्मोड़ा की जनता के भवन और प्रतिष्ठानों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा

उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग यह अच्छी तरह से समझ ले कि किसी भी दशा में नेशनल हाईवे का चौड़ीकरण नगर क्षेत्र से नही करने दिया जायेगा तथा अल्मोड़ा की जनता के भवन और प्रतिष्ठानों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि बड़ी दुर्भग्यपूर्ण बात है कि ये बात सरकार और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों की समझ में नहीं आ रही कि यदि नेशनल हाईवे का विस्तारीकरण नगर क्षेत्र से होता है तो लोधिया से कोसी तक तथा पांडे खोला से चितई तक सैकडो भवन इसकी जद में आएंगे और लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा ,उन्होंने कहा कि विनाश की शर्त पर विकास करना किसी भी दशा में उन्हे स्वीकार्य नहीं है।श्री कर्नाटक ने कहा कि यदि अविलंब नेशनल हाईवे को चौंसली कोसी बाईपास तथा पांडे खोला चितई तक बाईपास में परिवर्तित कर इसका शासनादेश स्वीकृत नहीं किया गया तो वे स्थानीय जनता को साथ लेकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित विभाग एवम सरकार की होगी।

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