जांच एजेंसी की निगरानी में प्रतियोगी परीक्षाएं करवाने की जरूरत: किरोला

अल्मोड़ा - बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता विनय किरोला ने प्रेस से बात करते हुए कहा कि  थोड़ी गहराई में जाकर देखे तो समझ मे आता है कि राज्य बनने के बाद से ही अवस्थापना के निर्माण से लेकर नियुक्तियो से लेकर बजट वितरण, भारत सरकार की योजनाओं में, प्रदेश की योजनाओं में भ्रष्टाचार के लक्षण आने लग गए थे, दुर्भाग्य है कि सरकारों के ढीले-ढाले,सतही रवैये ने उत्तराखंड में विभिन्न क्षेत्रों में भ्रष्टाचार बढ़ता चला गया।

उन्होंने कहा उत्तराखंड जैसे सीमित संसाधनों वाले राज्य में संसाधनों का अधिकतम उपयोग तभी हो सकता है, जब भष्ट्राचार पर नकेल कसी जाए, जहाँ अन्य राज्यो के पास प्रचुरता में संसाधन है मगर उत्तराखंड जैसे सीमित संसाधनों वाले राज्य में भ्रष्टाचार पर नकेल कस के ही संसाधनों का प्रचुर इस्तेमाल किया जा सकता है।

किरोला ने कहा उत्तराखंड जैसे राज्य जो मूलतः नौकरी-पेशा राज्य है, चूंकि राज्य गठन के बाद से लेकर 21 सालों में राज्य में सरकारी नौकरियों के अलावा युवाओं के लिए रोजगार के दूसरे अवसर पैदा करने में सरकारे नाकामयाब रही है।

प्रदेश का युवा लंबे समय तक दिन-रात मेहनत करके प्रतियोगी-परीक्षाओं की तैयारी करते है, ताकि सरकारी नौकरी पाकर युवा अपना भाग्य बदल सके, भ्रष्टतंत्र के कारण दिन-रात प्रतियोगी-परीक्षाओं की तैयारी कर अपने भाग्य का निर्माण करने वाले युवाओं के उनके साथ यू के एस एस सी जैसा भ्रष्टाचार युवाओ के मुंह मे तमाचा है, सरकार छोटे कर्मचारियों जो इस घोटाले में लिप्त है के साथ उन बड़ी मछलियों को भी पकड़े जो इस घोटाले के मास्टरमाइंड है और इनके खिलाफ फास्टट्रैक में मुकदमा दर्ज कर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक वर्क कल्चर विकसित करें।

इसके अतिरिक्त विनय किरौला ने माँग कि भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में सरकार को अयोग्य आदि के द्वारा होने वाली परीक्षाओं में जांच एजेंसी की निगरानी में प्रतियोगी परीक्षाएं करवाने की जरूरत है,साथ ही तत्काल कानून बनाने की जरूरत है यदि भविष्य में प्रतियोगी प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ तुरन्त ऍफ़ आई आर होगी साथ ही आपराधिक मुकदमा चलेगा।

उत्तराखंड में अनेकों ऐसे अवस्थापना है जो घटिया निर्माण के कारण इस्तेमाल ही नही हो पायी, जिसका सीधा कारण निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार है, इसका कारण जैसा कि मैंने लेख के शुरुआत में बताया कि राज्य बनने की शुरुआत से ही राज्य में भष्टाचार होने लगा था, जिसे सरकारों ने कभी देखा ही नही किया,जो दिन पे दिन बढ़ता चला गया, जिसकी वर्तमान नज़ीर यू के एस एस सी है।

उन्होंने कहा राज्य को एक ऐसे कार्य संस्कृति की अत्यंत आवश्कता है, राज्य के शासकों की वरीयता होनी चाहिए कि  बेहतरीन टेलेंटेड कर्मचारी, उम्दा इंफ्रा के लिए भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जाए।

प्रेस-वार्ता में मंच सयोंजक विनय किरौला मीडिया प्रभारी मयंक पंत,पूर्व प्रधानाचार्य जी0सी0जोशी,पंकज रौतेला,मनोज भट्ट,श्याम कनवाल,वीरेंद्र कनवाल,नितिन टम्टा, निरंजन पांडे आदि उपस्थित थे।

वेब फ़ास्ट न्यूज़ ब्यूरो

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