वनाग्नि से मुकाबले को हंस फाउंडेशन ने ग्राम स्तर पर तैयार किए फायर फाइटर: एनटीडी में हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम

 

अल्मोड़ा। जंगलों को आग (वनाग्नि) से बचाने और आपात स्थिति में त्वरित राहत कार्य सुनिश्चित करने के लिए 'द हंस फाउंडेशन' और संबंधित विभागों ने मिलकर एक महत्वपूर्ण पहल की है। वन चेतना केंद्र, एनटीडी (अल्मोड़ा) में ग्राम स्तर के फायर फाइटरों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य वनाग्नि की रोकथाम, आग पर प्रारंभिक नियंत्रण, सुरक्षित बचाव कार्य, अग्निशमन उपकरणों का सही उपयोग और आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने की जानकारी देना था।



प्रशिक्षण की मुख्य बातें (Key Highlights)

ग्राम स्तर पर त्वरित कार्रवाई: चयनित फायर फाइटर गांव में आग की सूचना तुरंत वन विभाग को देंगे और प्रारंभिक स्तर पर इसे नियंत्रित करने का प्रयास करेंगे।

सुरक्षा सर्वोपरि: यदि आग विकराल रूप ले ले, तो फायर फाइटर स्वयं जोखिम में न पड़कर सुरक्षित स्थान से वन विभाग के साथ समन्वय करेंगे।

'पिरूल लाओ, पैसे पाओ' योजना: प्रभागीय वनाधिकारी ने जंगलों से पिरूल हटाने और आय अर्जित करने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया।

आपदा प्रबंधन एवं प्राथमिक उपचार: घायल व्यक्तियों को निकालने, इंप्रोवाइज्ड स्ट्रेचर बनाने, फ्रैक्चर, घाव और CPR देने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।

विभिन्न विशेषज्ञों एवं अधिकारियों के विचार

1. पुरुषोत्तम थपलियाल (सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर, द हंस फाउंडेशन)

"उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में वन अग्निशमन एवं रोकथाम परियोजना चलाई जा रही है। वनाग्नि को रोकने में सामुदायिक सहभागिता और ग्रामीण जागरूकता सबसे बड़ा माध्यम है।"

2. प्रदीप धौलाखंडी (प्रभागीय वनाधिकारी - DFO)

"द हंस फाउंडेशन 2023 से वनाग्नि नियंत्रण के लिए सराहनीय कार्य कर रहा है। ग्रामीणों को खेतों में आड़ न जलाने और जंगलों में आग फैलाने वाले कारणों से बचने के लिए जागरूक करना बेहद जरूरी है।"

3. पंकज डंगवाल (एसडीआरएफ प्रशिक्षक)

"वनाग्नि के प्रमुख प्रकारों—जमीनी आग, सतही आग और शिखराग्नि पर नियंत्रण के अलग-अलग तरीके होते हैं। आग बुझाते समय सुरक्षित दूरी, टीमवर्क और सही संचार व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण है।"

4. आलोक कुमार (जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण)

"आपदा स्थिति में स्थानीय संसाधनों की मदद से तुरंत इंप्रोवाइज्ड स्ट्रेचर तैयार करके घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है।"

5. मुकेश चतुर्वेदी (अग्निशमन विभाग) एवं पूनम पंत (वन विभाग)

"सिलेंडर, विद्युत उपकरणों और जंगलों की आग बुझाने वाले आधुनिक उपकरणों का सही इस्तेमाल जानना हर फायर फाइटर के लिए आवश्यक है।"



कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख व्यक्तित्व

कार्यक्रम का संचालन द हंस फाउंडेशन के सीडीएस रजनीश रावत ने किया।

इस अवसर पर एसडीआरएफ से धीरज बिष्ट, राजेंद्र गिरी, सूरज बिष्ट; अग्निशमन विभाग से धीरेंद्र सिंह व बबीता जोशी; द हंस फाउंडेशन की ब्लॉक समन्वयक अनीता कनवाल, कैलाश, दीपक, शंकर, राजेंद्र, ज्योति, मनीष सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।

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