अल्मोड़ा की सांस्कृतिक और शास्त्रीय संगीत विरासत को अपूरणीय क्षति पहुँची है। सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक, प्रख्यात सितार वादक, बैठकी होली व रामलीला के पुरोधा पंडित गिरीश चंद्र जोशी का 78 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वो कुछ समय से बीमार थे। अपने निवास स्थान पर उन्होंने आखिरी सांस ली उनके चले जाने से कुमाऊँ की संगीत परंपरा और भारतीय शास्त्रीय गायन के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है।
किराना घराने की समृद्ध परंपरा के ध्वजवाहक
गुरु-शिष्य परंपरा में प्रशिक्षित पंडित जोशी भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुप्रसिद्ध 'किराना घराने' से ताल्लुक रखते थे—यह वही घराना है जिससे उस्ताद अब्दुल करीम खां, उस्ताद अब्दुल वाहिद खां, पंडित भीमसेन जोशी, विदुषी गंगूबाई हंगल, कुमार गंधर्व और विदुषी प्रभा आत्रे जैसी महान हस्तियाँ जुड़ी रही हैं। गायन के साथ-साथ सितार वादन में भी उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई, जिसके लिए वे विश्व प्रसिद्ध सितार वादक पंडित निखिल बनर्जी को अपना प्रेरणा स्रोत व गुरु मानते थे।
सांस्कृतिक योगदान और भावी पीढ़ी का मार्गदर्शन
केंद्रीय विद्यालय में संगीत शिक्षक के रूप में लंबी सेवा देने वाले पं. जोशी ने न केवल अपने विद्यालय, बल्कि देश-विदेश से आने वाले अनगिनत शिष्यों को संगीत की गूढ़ तालीम देकर प्रेरित किया। आकाशवाणी और देश के विभिन्न मंचों पर प्रस्तुतियों के अलावा, अल्मोड़ा के सांस्कृतिक माहौल को संगीतमय बनाए रखने में उनका ऐतिहासिक योगदान रहा। विशेष रूप से उनकी बैठकी होली की महफ़िलें और रामलीला की संगीतमय तालीम आज भी नगरवासी बड़ी शिद्दत से याद करते हैं।
कला जगत में शोक की लहर और भावभीनी श्रद्धांजलि
उनके आकस्मिक निधन से संगीत प्रेमियों और सांस्कृतिक संगठनों में गहरा शोक व्याप्त है। विभिन्न मंचों और उनके प्रिय शिष्यों ने परिजनों के प्रति अपनी गहन संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें याद किया:
* प्रमुख शिष्य व शास्त्रीय साधक: सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक प्रभात कुमार साह गंगोला, ललित वर्मा, सुशील तिवारी आदि
* जन नाट्य मंच के साथी: अशोक पंत, प्रमोद, धीरज पांडे, मुकुल उपाध्याय, विजय मेहता एवं जनवादी नौजवान सभा के राज्य अध्यक्ष यूसुफ तिवारी (डब्बू)।
* दि म्यूजिक वर्ल्ड के साथी: ओमी बूढ़ाथोकी, सोनू सिजवाली,भूपेंद्र मोहन पंत, अनिल दा , अनूप कुमार, और दीप जोशी,आदि
पंडित गिरीश चंद्र जोशी का जाना समूचे संगीत जगत और अल्मोड़ा की अनमोल धरोहर के लिए एक ऐसा शून्य छोड़ गया है जिसे भर पाना असंभव है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
प्रस्तुति सहयोग-
डॉ सुशील तिवारी
111 कुंजपुरा अल्मोड़ा



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