दयारा बुग्याल मिस्ट्री: खूबसूरत वादियों के बीच कहाँ ओझल हो गई ट्रैकर बबीता पांडे?
दयारा बुग्याल मिस्ट्री:
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित दयारा बुग्याल अपनी मखमली घास और खूबसूरत नज़ारों के लिए देश-विदेश के पर्यटकों और ट्रेकर्स के बीच बेहद लोकप्रिय है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस शांत और खूबसूरत जगह से एक ऐसी परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने हर किसी को हैरान और चिंतित कर दिया है।
रामनगर (नैनीताल) की रहने वाली 24 साल की एमबीए छात्रा बबीता पांडे इस ट्रैक से रहस्यमयी तरीके से लापता हो चुकी हैं। घटना को करीब 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बबीता का अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।
क्या है पूरी घटना?
बबीता पांडे 29 मई 2026 को अपने दो दोस्तों (हरमनपाल और हरमनप्रीत) के साथ दयारा बुग्याल घूमने आई थीं। ट्रेक के दौरान वे सभी 'गोई' बेस कैंप पर रुके हुए थे। 29 मई की रात को ही बबीता अचानक टेंट या कैंप के पास से संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गईं। जब सुबह तक उसका कुछ पता नहीं चला, तो प्रशासन को सूचित किया गया और खोजबीन शुरू हुई।
🚁 आसमान से जमीन तक महा-सर्च ऑपरेशन
बबीता की सुरक्षित वापसी के लिए उत्तराखंड का अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। वादियों और घने जंगलों को खंगालने के लिए कई टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं:
- खोजी एजेंसियां: एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF), आईटीबीपी (ITBP), सेना के जवान, पुलिस, वन विभाग और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) की एक्सपर्ट टीमें तैनात हैं।
- हाईटेक तकनीक: घने जंगलों, गहरी खाइयों और गुफाओं में ड्रोन कैमरों और स्निफर डॉग्स की मदद ली जा रही है।
- हवाई सर्वे: दुर्गम और बेहद कठिन रास्तों को खंगालने के लिए सेना और प्रशासन के हेलीकॉप्टरों से हवाई निगरानी की जा रही है।
- झील में तलाश: गोई कैंप के पास स्थित एक रहस्यमयी झील के तलवे की जांच के लिए SDRF की 6-सदस्यीय डीप डाइविंग टीम आधुनिक उपकरणों के साथ जुटी है।
गहराता सस्पेंस और उठते सवाल
दयारा बुग्याल को साल 2002 से एक सुरक्षित और शुरुआती ट्रेकर्स के अनुकूल ट्रैक माना जाता रहा है, और पिछले 24 सालों में यहाँ से गुमशुदगी की ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई थी। इस वजह से यह मामला और अधिक उलझ गया है। जांच एजेंसियां मुख्य रूप से इन पहलुओं पर काम कर रही हैं:
- आपसी विवाद या साजिश: बबीता के परिवार की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140(3) के तहत मामला दर्ज कर उसके साथ आए दोनों दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
- जंगली जानवरों का हमला: इलाके में भालू और तेंदुए होने के कारण इस एंगल से भी जांच की गई, लेकिन रेस्क्यू टीम को संघर्ष या किसी जानवर के पैरों के निशान नहीं मिले हैं।
- रास्ता भटकना या दुर्घटना: आशंका यह भी है कि रात के अंधेरे में बबीता रास्ता भूलकर किसी गहरी खाई या घने जंगल की तरफ निकल गई हों।
- फर्जी परमिट का भंडाफोड़: जांच में यह भी सामने आया है कि जिस ट्रैकिंग एजेंसी के जरिए वे गए थे, उसने कथित तौर पर फर्जी परमिट का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद पर्यटन विभाग ने उस एजेंसी का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिया है।
परिवार की थमती सांसें
सोशल मीडिया पर बबीता का एक आखिरी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी सामने आया है, जो रैथल गांव के पास का बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, बबीता की मां और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी आंखें बस इसी उम्मीद में पथरा रही हैं कि उनकी बेटी सकुशल घर लौट आए।
लेटेस्ट अपडेट: स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधीक्षक (SP) कमलेश उपाध्याय के मुताबिक जांच और तलाशी अभियान को तब तक नहीं रोका जाएगा जब तक कि बबीता का कोई ठोस सुराग नहीं मिल जाता। पहाड़ों की यह शांति अपने भीतर किस राज को छुपाए हुए है, इसका जवाब तो वक्त ही देगा।
आप इस पूरे मामले पर क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट्स में साझा करें और बबीता की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना करें।

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