अल्मोड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को आने वाले जन्मदिन पर सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से दिए जलवाने के कार्यक्रम को लेकर अल्मोड़ा की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं, जहाँ एक तरफ कांग्रेस ने इसे "तानाशाही" करार दिया है, वहीं भाजपा ने इसे "लाभार्थियों की स्वाभाविक खुशी" बताया है।
कांग्रेस का आरोप: 'करदाताओं के पैसे से कराया जा रहा व्यक्तिगत पीआर'
मामले की शुरुआत करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज ने सरकारी निर्देशों का कड़ा विरोध जताया। उन्होंने बताया कि 'जिसने जीवन संवारा, उसे आशीर्वाद हमारा' थीम के तहत विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्वयं सहायता समूह (SHG), लखपति दीदी, PM आवास योजना और अन्य योजनाओं के लाभार्थी 17 सितंबर की शाम 7 बजे अपने घरों के आगे दीप प्रज्वलित करें और उसकी फोटो-वीडियो साझा करें।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष भोज ने कहा कि सरकारी योजनाएं देश के करदाताओं की गाढ़ी कमाई से चलती हैं, किसी नेता की निजी संपत्ति से नहीं। लाभार्थियों को मिलने वाली सुविधाएं उनका संवैधानिक अधिकार हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी नागरिक को किसी व्यक्ति विशेष के प्रति कृतज्ञता जताने के लिए मजबूर करना उचित है? भोज ने चेतावनी दी कि यदि इस आदेश को तुरंत रद्द नहीं किया गया, तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।
भाजपा का पलटवार: 'कांग्रेस को दीपक से नहीं, उजाले से परेशानी है'
कांग्रेस के इस बयान पर भाजपा नगर अध्यक्ष विनीत बिष्ट ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति इतनी हताश हो चुकी है कि उसे गरीब के घर जलने वाला दीपक भी राजनीतिक प्रचार नजर आने लगा है।
विनीत बिष्ट ने स्पष्ट किया कि पीएम के जन्मदिन पर दीप जलाना किसी पर थोपा गया कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन परिवारों की खुशी और विश्वास की अभिव्यक्ति है जिनके जीवन में योजनाओं से वास्तविक बदलाव आया है। उन्होंने कांग्रेस पर सवाल दागते हुए पूछा:
* यदि किसी महिला को लखपति दीदी बनने या किसी गरीब परिवार को पक्का मकान मिलने पर प्रधानमंत्री को धन्यवाद देने का मन करता है, तो कांग्रेस उनकी खुशी पर सवाल उठाने वाली कौन होती है?
* दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने ऐसी पारदर्शी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जिससे योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सकें?
भाजपा नेता ने कहा कि सरकारी बजट पहले भी जनता का ही पैसा था, लेकिन उसे सही नीयत के साथ हर घर तक शौचालय, पक्का मकान और रोजगार के रूप में पहुँचाने का काम वर्तमान सरकार ने किया है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सलाह दी कि वे "दीपक बुझाने की राजनीति" छोड़कर उन गरीब परिवारों के घर जाएं, जहाँ सरकारी योजनाओं से खुशहाली आई है।
सियासी निष्कर्ष
अल्मोड़ा से उठी यह राजनीतिक जंग दर्शाती है कि आने वाले दिनों में सरकारी योजनाओं और 'लाभार्थी वर्ग' को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी तीर और तेज होने वाले हैं। जहाँ कांग्रेस इसे सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग मान रही है, वहीं भाजपा इसे सुशासन और जन-आस्था की जीत
बता रही है।

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