सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर एक व्यंग्यात्मक पोस्टर (कैरिकेचर) काफी वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि सरकार अब UPI से होने वाले हर लेन-देन पर "सुविधा शुल्क" या "टोल" वसूलने की तैयारी में है। पोस्टर में स्लैब बनाकर ₹2 से लेकर ₹50 तक का शुल्क वसूलने की बात दिखाई गई है।
यदि आप भी इस खबर या पोस्टर से परेशान हैं, तो जानिए इसके पीछे की पूरी सच्चाई और नियम:
1. आम जनता (P2P और सामान्य खरीदार) के लिए UPI 100% फ्री है
NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) और वित्त मंत्रालय के नियमों के अनुसार आम लोगों द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (Person-to-Person / P2P) को भेजे जाने वाले पैसों पर कोई शुल्क नहीं लगता।
दुकानदारों, सब्जी विक्रेताओं, दूध या राशन की दुकानों पर सामान्य UPI ट्रांसफर करने पर आम ग्राहकों से कोई टैक्स या 'सुविधा शुल्क' नहीं काटा जाता।
2. वायरल पोस्टर की गलतफहमी कहाँ से आई?
वायरल पोस्टर में दावा किया गया है कि ₹2000 के भुगतान पर ₹28 शुल्क लगेगा। यह पूरी तरह भ्रामक और गलत है। असली नियम निम्नलिखित हैं:
PPI (पेमेंट वॉलेट्स) पर इंटरचेंज फीस: यदि कोई ग्राहक अपने वॉलेट (जैसे Paytm Wallet, PhonePe Wallet आदि) से किसी मर्चेंट (दुकानदार) को ₹2,000 से अधिक का भुगतान करता है, तो दुकानदार (मर्चेंट) पर 1.1% तक का इंटरचेंज शुल्क लागू होता है। यह शुल्क सामान्य बैंक-टू-बैंक UPI पर लागू नहीं होता है और न ही ग्राहक के खाते से कटता है।
हाई-वैल्यू कमर्शियल मर्चेंट लेन-देन (MDR का प्रस्ताव): हाल ही में संसद में टैक्स कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत भविष्य में बैंकों और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स को ₹2,000 से अधिक के बड़े कमर्शियल मर्चेंट पेमेंट्स पर मामूली मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति मिल सकती है। यह भी केवल बड़े व्यावसायिक लेन-देन के लिए होगा, आम जनता के दैनिक UPI ट्रांजेक्शन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
3. फास्टैग (FASTag) और टोल प्लाजा का नियम क्या है?
राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर टोल प्लाजा से बिना वैध फास्टैग (FASTag) के गुजरने और UPI से टोल चुकाने पर 1.25 गुना शुल्क लिया जाता है, जिसका उद्देश्य फास्टैग के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और लेन में लगने वाले समय को घटाना है। इसका आम UPI भुगतानों से कोई संबंध नहीं है।
वायरल हो रहा यह पोस्टर राजनीतिक व्यंग्य या डिजिटल जागरूकता अभियानों पर तंज कसने के लिए बनाया गया एक कार्टून है। सरकार या NPCI द्वारा ऐसा कोई "UPI शुल्क स्लैब" (₹2 से ₹50 तक) आम नागरिकों पर लागू नहीं किया गया है। UPI का सामान्य इस्तेमाल पहले की तरह ही पूरी तरह से नि:शुल्क है।

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