अल्मोड़ा, 10 अगस्त 2026
संयुक्त ट्रेड यूनियनों के देशव्यापी आह्वान पर आज सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) जिला इकाई ने विभिन्न यूनियनों के साथ मिलकर अल्मोड़ा के चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में विशाल धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान श्रमिक नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी करार देते हुए जमकर नारेबाजी की।
पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप धरने के दौरान आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि 'व्यापार सुगमता' (Ease of Doing Business) के नाम पर लाई गई 4 नई श्रम संहिताएं पूरी तरह से पूंजीपतियों के पक्ष में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संहिताओं के जरिए मजदूरों को फिर से गुलाम बनाने की साजिश रची जा रही है। वक्ताओं ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नए कानूनों से मजदूरों के संगठन बनाने, यूनियन बनाने और अपने हकों के लिए हड़ताल करने जैसे लोकतांत्रिक अधिकारों को छीना और कमजोर किया जा रहा है।
अस्थाई रोजगार का किया विरोध सभा में श्रमिक नेताओं ने कहा कि आज स्थाई रोजगार को खत्म किया जा रहा है। स्थाई नौकरियों की जगह ठेका प्रथा, अंशकालिक (पार्ट टाइम), आउटसोर्सिंग और निश्चित अवधि के रोजगार (फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट) को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने इसे मजदूरों को ट्रेड यूनियनों से दूर करने और उनके शोषण की एक सोची-समझी साजिश बताया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें: सरकार से कड़े शब्दों में निम्नलिखित मांगें की गईं-
- चारों श्रमिक विरोधी श्रम संहिताओं को तुरंत प्रभाव से समाप्त किया जाए।
- श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह लागू किया जाए।
- सभी को स्थाई रोजगार दिया जाए और ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
- 'समान काम का समान वेतन' का नियम सख्ती से लागू हो।
- सभी असंगठित और संगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
- बेलगाम महंगाई पर तुरंत नियंत्रण किया जाए।
- श्रमिकों के बुनियादी और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
ये रहे मौजूद इस महत्वपूर्ण धरना-प्रदर्शन में मुख्य रूप से ममता भट्ट, भगवती आर्य, हेमा अधिकारी, उमा देवी, पार्वती देवी, प्रेम जड़ौत, आर.पी. जोशी, उपेंद्र, अशोक पंत, प्रमोद तिवारी और योगेश टम्टा सहित भारी संख्या में विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारी व श्रमिक उपस्थित रहे।
(नोट: आपके मूल पाठ में 'अशोक पेंट' लिखा था, जिसे स्थानीय उपनामों की प्रामाणिकता को ध्यान में रखते हुए समाचार में 'अशोक पंत' कर दिया गया है।)

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