अल्मोड़ा के हवालबाग विकासखंड से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार को आयोजित की जाने वाली विशेष ग्राम सभा बैठकों का ग्राम प्रधान संगठन सहित सभी ग्राम प्रधानों ने पूर्ण रूप से बहिष्कार कर दिया।
🚨 बहिष्कार के मुख्य कारण:
* अधिकारों और सम्मान की अनदेखी:
ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नयाल ने बताया कि 2 अक्टूबर की विशेष ग्राम सभा बैठक संबंधी पत्र में ग्राम प्रधानों की भूमिका और अध्यक्षता का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। जबकि नियमानुसार ग्राम सभा की बैठकों की अध्यक्षता ग्राम प्रधान ही करते हैं। इसे प्रधानों के सम्मान के खिलाफ माना गया।
* उचित और समय पर सूचना का अभाव:
बैठकों के आयोजन को लेकर ग्राम प्रधानों को समय पर और सही तरीके से सूचित नहीं किया गया, जिससे उनमें भारी नाराजगी है।
* जीपीडीपी (GPDP) बैठकों के रोस्टर पर आपत्ति:
खंड विकास अधिकारी द्वारा 30 सितंबर को जारी पत्र में अक्टूबर से GPDP (ग्राम पंचायत विकास योजना) की बैठकें शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रधान संगठन की मांग है कि यह रोस्टर 15 नवंबर के बाद निर्धारित किया जाए, क्योंकि:
* वर्तमान समय कामकाजी (कृषि/मजदूरी) माह है।
* अक्टूबर-नवंबर के दौरान वीबी-जी राम जी योजना के तहत कार्य बंद रहते हैं।
* लंबित मांगों की अनदेखी:
संगठन के महामंत्री विनोद जोशी और वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह मेहरा का कहना है कि सरकार योजनाओं के क्रियान्वयन में तो प्रधानों का सहयोग लेती है, लेकिन उनकी जायज मांगों और अधिकारों की लगातार अनदेखी कर मनमाने फैसले ले रही है।
🤝 किन-किन का मिला समर्थन?
ग्राम प्रधानों के इस बहिष्कार और एकजुटता को मंत्री प्रमोद जोशी, उपाध्यक्ष नवीन भट्ट, चंद्रिका पंत सहित हवालबाग विकासखंड के अन्य सभी ग्राम प्रधानों ने अपना पूर्ण समर्थन दिया।
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क्या स्थानीय प्रशासन को ग्राम पंचायतों से जुड़े फैसले लेते समय ग्राम प्रधानों को विश्वास में लेना चाहिए? अपनी राय नीचे Comment करके जरूर बताएं और इस पोस्ट
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