मामले के मुख्य तथ्य:
5 करोड़ रुपये का अवैध लेनदेन: जांच के अनुसार, यह गिरोह पिछले 4 महीनों में करीब 5 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध साइबर लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दे चुका है।
गिरफ्तारी: मुख्य सरगना सहित 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और 2 नाबालिगों को संरक्षण में लिया गया है। गिरोह में स्थानीय युवक भी शामिल थे।
बरामदगी: मौके से 24 एक्टिव एटीएम/डेबिट कार्ड, 12 एक्टिव सिम कार्ड, 11 प्रीमियम स्मार्टफोन, 1 लैपटॉप, 1 आईपैड, 6 चेकबुक, 4 पासबुक और ₹1,18,800 नकद बरामद हुए हैं।
ठगी और काम करने का तरीका (Modus Operandi):
म्यूल बैंक खाते और सिम पर कब्जा: गिरोह युवाओं को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद उनके एटीएम कार्ड, पासबुक और एक्टिव सिम कार्ड खुद अपने पास रख लेता था।
नकदी की निकासी और लेयरिंग: ठगी की रकम को खातों में मंगाने के बाद एटीएम या कैश डिपॉजिट मशीन (CDM) के जरिये तुरंत निकालकर अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
क्रिप्टोकरेंसी (USDT) का इस्तेमाल: मुख्य सरगना नकद रुपयों से बाइनेंस (Binance) के जरिये डिजिटल करेंसी USDT खरीदता था और फिर टेलीग्राम पर अनधिकृत ऐप के जरिये उसे बेचकर रोज 4 से 5 लाख रुपये का अवैध लेनदेन करता था।
जनहित संदेश:
किसी भी स्थिति में थोड़े से कमीशन या लालच में आकर अपना बैंक खाता, सिम कार्ड, पासबुक या एटीएम कार्ड किसी अज्ञात व्यक्ति को न दें। किराए पर दिया गया बैंक खाता साइबर अपराध में इस्तेमाल होने पर खाताधारक भी कानूनी शिकंजे में आ सकता है। किसी भी प्रकार के साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।

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