राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन (NMHS) और गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (GBPNIHE) को लेकर हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्टों में फर्जी दावों और भ्रामक खबरों का हवाला दिया गया है। इन मीडिया रिपोर्टों में संस्थान की भर्ती प्रक्रिया, कर्मचारियों को हटाने, साक्षात्कार के माध्यम और मानदेय (Stipend/Salary) को लेकर कई सवाल उठाए गए थे।
संस्थान ने इन सभी आरोपों को तथ्यहीन, मनगढ़ंत और संस्था की छवि धूमिल करने वाला बताते हुए आधिकारिक स्पष्टीकरण (Press Release/Statement) जारी किया है।
ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से जानिए मीडिया के आरोपों और संस्थान के आधिकारिक रुख से जुड़ी मुख्य बातें:
1. कर्मचारियों को बिना सूचना हटाने का आरोप
* मीडिया रिपोर्ट का दावा: परियोजना कर्मचारियों को बिना किसी कारण और बिना पूर्व सूचना के अचानक सेवा से बाहर कर दिया गया।
* संस्थान का स्पष्टीकरण: यह दावा पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से गलत है। NMHS के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) का पुनर्गठन संशोधित NMHS Guidelines, 2025 के तहत किया गया है। संबंधित कर्मचारियों को 20 जुलाई 2026 को ही आधिकारिक संदर्भ पत्र (Reference letter) जारी कर सूचित कर दिया गया था। यह पूरी कार्रवाई नए सिरे से भर्ती और पुनर्गठन की तय प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थी।
2. पूरी भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन होने का दावा
* मीडिया रिपोर्ट का दावा: कर्मचारियों का चयन केवल ऑनलाइन साक्षात्कार (Online Interview) के जरिए किया गया।
* संस्थान का स्पष्टीकरण: साक्षात्कार पूरी तरह ऑनलाइन नहीं थे। इंटरव्यू GBPNIHE, अल्मोड़ा में ऑफलाइन (सशरीर) आयोजित किए गए थे। चूंकि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कुछ विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े थे, इसलिए इसे 'पूरी तरह ऑनलाइन इंटरव्यू' कहना गलत है।
3. अयोग्य और गैर-हिमालयी अभ्यर्थियों के चयन का आरोप
* मीडिया रिपोर्ट का दावा: चयन प्रक्रिया में DoPT के नियमों की अनदेखी की गई और गैर-हिमालयी राज्यों के अनुभवहीन लोगों को प्राथमिकता दी गई।
* संस्थान का स्पष्टीकरण:
* नियमों का पालन: PMU के अंतर्गत पद प्रोजेक्ट-आधारित Consultant के हैं, जो नियमित केंद्रीय सेवाओं जैसे नहीं हैं। इनमें स्वीकृत संस्थागत व्यवस्था और पद की विशिष्ट आवश्यकताओं का पालन किया जाता है।
* स्थानीय प्रतिनिधित्व: चयनित अभ्यर्थियों में एक बड़ी संख्या हिमालयी राज्यों से ही है। चयन केवल पुराने अनुभव पर नहीं, बल्कि योग्यता, शैक्षणिक पृष्ठभूमि और साक्षात्कार में प्रदर्शन के आधार पर निष्पक्ष रूप से किया गया है।
4. अधिकारियों पर पक्षपात और मानदेय में विषमता का आरोप
* मीडिया रिपोर्ट का दावा: अधिकारियों ने किसी विशेष वर्ग को लाभ पहुंचाने के लिए भर्ती की और मानदेय में अनियमितताएं कीं।
* संस्थान का स्पष्टीकरण: मानदेय (Honorarium) में बदलाव पदों की नई प्रकृति, जिम्मेदारियों और संशोधित PMU संरचना के अनुसार तय किया गया है। किसी व्यक्ति विशेष को अलग से लाभ देने का सवाल ही नहीं उठता। पुराने पदों और पुनर्गठित PMU पदों की सीधी तुलना करना व्यावहारिक नहीं है।
संस्थागत साख और आगे की कानूनी कार्रवाई
जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (GBPNIHE) पिछले 35 वर्षों से भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, ग्लेशियर अनुसंधान, जल सुरक्षा और स्थानीय आजीविका संवर्धन के लिए पूर्ण निष्ठा व पारदर्शिता से काम कर रहा है।
संस्थान ने स्पष्ट किया है कि बिना तथ्यों के और निराशा में लगाए गए इन आरोपों से उसकी साख को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है। संस्थान अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए भ्रामक आरोप लगाने वाले व्यक्तियों और तत्वों के खिलाफ उचित कानूनी/प्रशासनिक कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है।

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