अल्मोड़ा: देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा में मंगलवार को ऐतिहासिक और आस्था के प्रतीक 'नंदादेवी मेले' का भव्य शुभारंभ हुआ। इस खास मौके पर शहर में एक मनमोहक शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे अल्मोड़ा को भक्ति और लोक-संस्कृति के रंगों में सराबोर कर दिया।
जीजीआईसी ड्योढ़ीपोखर से मंदिर परिसर तक गूंजे जयकारे
शोभायात्रा की शुरुआत जीजीआईसी ड्योढ़ीपोखर से हुई, जो पल्टन बाजार समेत नगर के मुख्य बाजारों से गुजरती हुई ऐतिहासिक नंदादेवी मंदिर परिसर पहुंची। इस दौरान 'मां नंदा-सुनंदा' के जयकारों से पूरा शहर गुंजायमान हो उठा। रास्ते भर स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने रुक-रुक कर यात्रा का स्वागत किया और स्कूली बच्चों पर जमकर पुष्पवर्षा की।
नंदा राजजात की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत की गई 'नंदा राजजात' की जीवंत झांकी रही। पारंपरिक उत्तराखंडी परिधानों में सजे बच्चों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से राज्य की समृद्ध लोक-परंपराओं और अटूट धार्मिक आस्था को बड़े सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। इस आयोजन ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का एक बेहतरीन संदेश दिया।
सांस्कृतिक प्रतियोगिता में जीजीआईसी अल्मोड़ा ने मारी बाजी
नंदादेवी मंदिर परिसर पहुंचने पर शोभायात्रा में शामिल विभिन्न विद्यालयों के प्रदर्शन के आधार पर परिणामों की घोषणा की गई:
प्रथम स्थान: जीजीआईसी (GGIC) अल्मोड़ा
द्वितीय स्थान: ग्रीन फील्ड स्कूल
तृतीय स्थान: जीआईसी (GIC) अल्मोड़ा
इस प्रतियोगिता में आशीष वर्मा, दीप जोशी और भूपेन्द्र बिष्ट ने निर्णायक की भूमिका निभाई।
जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों की रही गरिमामय मौजूदगी
उत्सव के इस बड़े मंच पर क्षेत्र की कई प्रमुख राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में विधायक मनोज तिवारी, मेयर अजय वर्मा, दर्जा राज्यमंत्री गोविंद पिल्खवाल, मेला अध्यक्ष मनोज वर्मा, मुख्य संयोजक तारा चंद्र जोशी, मेला सचिव मनोज सनवाल, सांस्कृतिक संयोजक अर्जुन बिष्ट चीमा, पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान व कैलाश शर्मा, बिट्टू कर्नाटक, राजेंद्र बिष्ट, जगत तिवारी, कैलाश गुरुरानी सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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