सामवेदी उपाकर्म 2026: 13 सितंबर को हस्त नक्षत्र और हरतालिका तीज का शुभ संयोग, जानें पूजा का सही मुहूर्त और विधि

 


यदि आप सामवेद के अनुयायी हैं, तो इस साल 13 सितंबर का दिन आपके लिए बेहद पावन और महत्वपूर्ण होने जा रहा है। इस दिन हस्त नक्षत्र और हरतालिका तीज का एक अद्भुत और बेहद शुभ संयोग बन रहा है।

अल्मोड़ा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी के अनुसार, सामवेदी उपाकर्म के लिए यह समय पूरी तरह शास्त्रसम्मत है। आइए जानते हैं इस दिन का सही मुहूर्त, तिथि का समय और उपाकर्म का धार्मिक महत्व।

⏰ शुभ मुहूर्त और तिथि समय (Tithi & Shubh Muhurat)

द्वितीया तिथि समाप्त: सुबह 7:09 बजे (इसके तुरंत बाद तृतीया तिथि शुरू होगी)

हस्त नक्षत्र की समाप्ति: दोपहर 1:07 बजे तक

अनुष्ठान का सबसे उत्तम पुण्यकाल: सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक

ब्लॉग टिप: श्रद्धालुओं को अपनी पूजा, ऋषितर्पण और जनेऊ बदलने की प्रक्रिया सुबह 7:30 बजे से मध्याह्न के बीच ही पूरी कर लेनी चाहिए।

🕉️ सामवेदी उपाकर्म की परंपरा और महत्व

सामान्य रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है, लेकिन सामवेद को मानने वाले (विशेषकर उत्तराखंड का तिवारी समुदाय) आम रक्षाबंधन के लगभग 17 से 18 दिन बाद हरतालिका तीज के दिन अपना रक्षाबंधन और उपाकर्म पर्व मनाते हैं।

इस दिन क्या-क्या किया जाता है?

पवित्र स्नान व ऋषितर्पण: श्रद्धालु नदी, तालाब या नजदीकी देवस्थानों में जाकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ तर्पण करते हैं।

नूतन यज्ञोपवीत धारण: पुराना जनेऊ उतारकर विधि-विधान से अभिमंत्रित नया जनेऊ (नूतन यज्ञोपवीत) धारण किया जाता है।

रक्षा सूत्र (राखी) बांधना: पूजन के बाद अभिमंत्रित रक्षा सूत्र बांधा जाता है, जो नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है।

📌 निष्कर्ष (Summary)

13 सितंबर को हस्त नक्षत्र और तृतीया तिथि का यह दुर्लभ योग पूजा-अनुष्ठान के लिए अत्यंत फलदायी है। यदि आप भी सामवेदी परंपरा का पालन करते हैं, तो दिए गए शुभ समय में ही अपनी पूजा संपन्न करें।

आपको और आपके परिवार को सामवेदी उपाकर्म एवं हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं!

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