नैनीताल में दूषित पानी से फैला पीलिया: 2 लोगों की मौत, 100 से ज्यादा बीमार, कई घरों में लटके ताले

 


नैनीताल जिले के ज्योलिकोट और आसपास के इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई के कारण हाहाकार मचा हुआ है। जहरीले पानी के सेवन से लगभग 5 से 6 गांव गंभीर रूप से प्रभावित हैं। ग्रामीणों में पीलिया (Jaundice) और पेट से संबंधित गंभीर बीमारियों के लक्षण देखे जा रहे हैं। स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि अब तक 2 लोगों की जान जा चुकी है और 100 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं।

छीड़ा गांव में पसरा सन्नाटा, घरों में लटके ताले

घटना की जमीनी हकीकत जानने के लिए जब हमारी टीम छीड़ा गांव पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद खौफनाक था। दूषित पानी से पहली मौत इसी गांव में हुई थी।

खाली पड़े मकान: गांव के ज्यादातर घरों में ताले लटके हुए हैं।

इलाज के लिए पलायन: बीमार ग्रामीणों को इलाज के लिए हल्द्वानी, नैनीताल और अन्य हायर सेंटर ले जाया गया है।

प्रशासन के प्रति गुस्सा: जहां स्वास्थ्य विभाग राहत कार्य में जुटा है, वहीं ग्रामीणों का गुस्सा पेजल संस्थान की लापरवाही पर फूट रहा है।

"गांव के लगभग हर घर में कोई न कोई बीमार है। स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है और अधिकारी कोई सुध नहीं ले रहे।"

— सीमा मनराल व कमला बिष्ट, स्थानीय ग्रामीण

आवाज उठाने वाली 26 वर्षीय नीमा जोशी खुद बनीं शिकार

इस त्रासदी की सबसे दर्दनाक बात यह है कि जिस 26 वर्षीय नीमा जोशी ने सबसे पहले दूषित पानी की शिकायत दर्ज कराई थी, वह खुद इसकी चपेट में आ गईं।

तबीयत बिगड़ने पर हायर सेंटर रेफर: नीमा की स्थिति बिगड़ने पर परिजन उन्हें पहले हल्द्वानी और फिर हायर सेंटर ले गए, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप: परिजनों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद जल संस्थान के किसी अधिकारी ने मौके पर आकर जांच नहीं की।

"अगर अधिकारी समय रहते शिकायत पर ध्यान देते और पानी की जांच करवाते, तो आज नीमा हमारे बीच होती। इस मौत के जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ पेयजल विभाग के अधिकारी हैं।"

— भुवन चंद्र जोशी व कविता जोशी, मृतका के परिजन

पेजल विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और जल संस्थान के दावों की पोल खोलकर रख दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वच्छ पेयजल मुहैया कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी थी, जिसमें वे पूरी तरह विफल रहे।

समय पर सैंपलिंग न होना: शिकायत के बाद भी पानी की गुणवत्ता जांचने में देरी की गई।

वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव: दूषित सप्लाई रोकने के बाद गांवों में टैंकरों से साफ पानी नहीं पहुंचाया गया।

वर्तमान में गंभीर मरीजों का इलाज जारी है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत सहायता दी जाए।

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