उत्तराखंड: 18 सचिवों के साथ बैठक और सीएम धामी के निर्देशों के 2 साल बाद भी फाइल पेंडिंग, एसएसबी युद्ध प्रशिक्षित गुरिल्लाओं में भारी रोष।

 


देहरादून (07 सितंबर 2026): एसएसबी युद्ध प्रशिक्षित गुरिल्ला संगठन उत्तराखंड ने प्रदेश सरकार और शासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि ठीक दो वर्ष पूर्व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 18 सचिवों के साथ वर्चुअल माध्यम से बैठक कर एसएसबी गुरिल्लाओं को नौकरी, पेंशन और ग्रेच्युटी देने का आश्वासन दिया था। हालांकि, दो साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे पूरे प्रदेश के गुरिल्लाओं में गहरी नाराजगी है।

शासनादेश और उच्च स्तरीय निर्देशों की अनदेखी का आरोप

संगठन के प्रतिनिधियों के अनुसार, दिनांक 20 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री द्वारा अधिकारियों और एसएसबी स्वयंसेवकों के प्रतिनिधियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में मांगों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अधिकांश संबंधित विभागों ने कोई कदम नहीं उठाया।

इसके बाद, 01 जुलाई 2026 को संगठन के अनुरोध पर मुख्यमंत्री ने पुनः मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन को लिखित निर्देश जारी किए थे। लेकिन आज तक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संबंधित विभागों और एसएसबी प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक तक आहूत नहीं की गई है।

फाइल पेंडिंग रहने से बढ़ा आक्रोश

गुरिल्ला संगठन का कहना है कि खुद मुख्यमंत्री द्वारा फाइल पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद भी फाइल मुख्य सचिव के स्तर पर पेंडिंग चल रही है। शासन के इस रवैये को संगठन ने कोरा आश्वासन करार दिया है और कहा कि उच्च स्तर पर लिए गए निर्णयों का अनुपालन न होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

प्रदेशभर के 12 जिलों में जोरदार विरोध

मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने पर प्रदेश मीडिया प्रभारी अनिल प्रसाद भट्ट, हिम्मत सिंह मेहर (ब्लॉक अध्यक्ष), बृजमोहन गुसाईं (उपाध्यक्ष), हरि सिंह परमार (सचिव), मधुसूदन बंगवाल (महासचिव), अरविंद कुमार, सत्तू लाल, राजेंद्र भंडारी (ब्लॉक संयोजक), राजकुमारी देवी और लक्ष्मी भट्ट सहित उत्तराखंड के सभी 12 जिलों से जुड़े एसएसबी युद्ध प्रशिक्षित गुरिल्लाओं ने सरकार और शासन के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है।

संगठन ने मांग की है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में तुरंत संयुक्त बैठक बुलाई जाए ताकि पेंडिंग फाइलों पर कार्रवाई कर देशभक्त गुरिल्लाओं को उनका हक मिल सके।

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