नई दिल्ली:
विश्व बैंक (World Bank) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत वैश्विक स्तर पर संस्था का सबसे बड़ा कर्जदार देश बन गया है। भारत पर विश्व बैंक का कुल बकाया ऋण लगभग 39.3 बिलियन डॉलर दर्ज किया गया है। इस सूची में भारत के बाद इंडोनेशिया (लगभग 22.2 बिलियन डॉलर) और पाकिस्तान (लगभग 20 बिलियन डॉलर) का स्थान है।
विकास परियोजनाओं में हो रहा इस्तेमाल
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस ऋण को देश के व्यापक ढांचागत (Infrastructure) और सामाजिक विकास से जोड़कर देखा जाना चाहिए। भारत द्वारा लिया गया यह फंड मुख्य रूप से:
सड़क और रेल नेटवर्क: राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए।
अक्षय ऊर्जा व जलवायु: सौर ऊर्जा और पर्यावरण अनुकूल पहलों के लिए।
डिजिटल और सामाजिक कल्याण: डिजिटल इंडिया और स्वास्थ्य-शिक्षा योजनाओं को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
पाकिस्तान से तुलना और अर्थव्यवस्था का पैमाना
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान से तुलना को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि दोनों देशों की आर्थिक स्थिति में बहुत बड़ा अंतर है:
ऋण का प्रकार: पाकिस्तान का कर्ज अक्सर उसके गिरते विदेशी मुद्रा भंडार और भुगतान संतुलन संकट (Balance of Payments Crisis) को संभालने के लिए होता है।
भारत का परिदृश्य: भारत की अर्थव्यवस्था (~3.7 ट्रिलियन डॉलर+) और विशाल GDP के आकार के मुकाबले 39.3 बिलियन डॉलर का यह ऋण काफी कम और सुरक्षित अनुपात (low debt-to-GDP ratio) में है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस कर्ज की तुलना में कई गुना अधिक है।
यह तथ्य सही है कि भारत विश्व बैंक से सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाला देश है, लेकिन इसे आर्थिक कमजोरी के बजाय भारत की बड़ी विकास जरूरतों और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में उसकी मजबूत साख (Creditworthiness) के रूप में देखा जाता है।

एक टिप्पणी भेजें