सार्वजनिक जगहों पर रखे कूड़ेदानों पर कोर्ट सख्त: अब खुले में कचरा फेंका तो लगेगा भारी जुर्माना!

 


लेखक: डी.एस.सिजवाली 

श्रेणी: न्यूज़ / नागरिक अधिकार / कानून

​क्या आपकी गली या कॉलोनी के मोड़ पर रखे कूड़ेदान (डस्टबिन) से बदबू आती है? या क्या लोग कचरा डस्टबिन में डालने के बजाय उसके बाहर फेंक कर चले जाते हैं?

​अगर हाँ, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है! हाल ही में देश की शीर्ष अदालतों (सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट्स) ने सार्वजनिक स्थानों पर रखे कूड़ेदानों और कचरा प्रबंधन को लेकर कई ऐतिहासिक और सख्त आदेश जारी किए हैं।

​आइए जानते हैं कि कोर्ट के इन नए आदेशों का आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा और आपके पास क्या अधिकार हैं।

​1. खुले डस्टबिन 'जीने के अधिकार' का उल्लंघन (दिल्ली हाईकोर्ट)

​अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि रिहायशी इलाकों में खुले और गंदे कूड़ेदानों का होना नागरिकों के 'Right to Life' (जीने के अधिकार - अनुच्छेद 21) का सीधा उल्लंघन है।

  • आदेश: नगर निगमों को रिहायशी इलाकों के पास से खुले कूड़ेदान तुरंत हटाने या उन्हें पूरी तरह ढककर रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बीमारियों का खतरा न फैले।

​2. डस्टबिन की सफाई नहीं हुई तो अधिकारी पर होगी कार्रवाई (राजस्थान हाईकोर्ट)

​अक्सर देखा जाता है कि डस्टबिन तो रख दिए जाते हैं, लेकिन कई-कई दिनों तक उनकी सफाई नहीं होती।

  • नया नियम: हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि कॉलोनियों में डस्टबिन की नियमित सफाई की जवाबदेही वहां के हेल्थ इंस्पेक्टर (स्वास्थ्य निरीक्षक) की होगी। अगर डस्टबिन ओवरफ्लो मिला या बदबू फैली, तो सीधे संबंधित अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

​3. डस्टबिन के बाहर कचरा फेंका तो ₹5,000 तक का जुर्माना

​अदालत ने पाया कि कई बार डस्टबिन होने के बावजूद लोग कचरा बाहर सड़क पर या नालियों में फेंक देते हैं, जिससे मानसून में वाटरलॉगिंग (जलभराव) की भीषण समस्या होती है।

  • बड़ा बदलाव: कोर्ट ने खुले में या नालियों में कचरा फेंकने वालों पर सख्त रवैया अपनाते हुए जुर्माना राशि बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अब डस्टबिन के बाहर कूड़ा फेंकने पर ₹500 से लेकर ₹5,000 तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इन जगहों पर निगरानी रखने को कहा गया है।

​4. कचरे का 4 श्रेणियों में पृथक्करण (सुप्रीम कोर्ट)

​सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों पर सख्ती दिखाते हुए कहा है कि कचरा प्रबंधन केवल सफाईकर्मियों का काम नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।

​अब कचरा डस्टबिन में डालते समय उसे 4 अलग-अलग श्रेणियों में बांटना अनिवार्य है:

  1. गीला कचरा (रसोई का कचरा, बचा खाना)
  2. सूखा कचरा (प्लास्टिक, कागज, गत्ता)
  3. सैनिटरी वेस्ट (डायपर, पैड आदि)
  4. स्पेशल वेस्ट (ई-कचरा, कांच, दवाइयां)

​आम जनता के लिए क्या है सीख?

​अदालतों के इन फैसलों से एक बात साफ है: स्वच्छता अब सिर्फ एक सलाह नहीं, बल्कि कानून है।

  • ​हमेशा कचरे को घर पर ही अलग (segregate) करें।
  • ​डस्टबिन के बाहर कचरा फेंकने की गलती न करें।
  • ​अगर आपके इलाके में डस्टबिन ओवरफ्लो हो रहा है या समय पर साफ नहीं हो रहा, तो आप नगर निगम की शिकायत हेल्पलाइन या कोर्ट के इन आदेशों का हवाला देकर अथॉरिटी से जवाब मांग सकते हैं।

आपको क्या लगता है? क्या जुर्माना बढ़ाने से लोग सार्वजनिक जगहों पर कचरा फेंकना बंद करेंगे? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें!

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