ख़ास खबर :डिजिटल बैंकिंग और UPI सुरक्षा पर नए दिशा-निर्देश



भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा डिजिटल बैंकिंग, UPI और ऑनलाइन पेमेंट सुरक्षा को लेकर जारी किए गए नए और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश (Rules & Guidelines) की प्रमुख बातें नीचे दी गई हैं:


1. अनिवार्य टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (Mandatory 2FA / AFA)

  • अतिरिक्त सुरक्षा परत: सभी डिजिटल लेन-देन (UPI, क्रेडिट/डेबिट कार्ड और ई-वॉलेट) के लिए दो-स्तरीय सत्यापन अनिवार्य है।

  • डायनामिक सिक्योरिटी: सत्यापन के दो चरणों में से कम से कम एक dynamic (जैसे ऐप-आधारित बायोमेट्रिक, डिवाइस बाइंडिंग, या पासकी) होना ज़रूरी है। केवल सादे OTP आधारित सुरक्षा को अब जोखिम भरा माना गया है।


2. जोखिम-आधारित सुरक्षा और डिवाइस बाइंडिंग (Risk-Based Authentication)

  • अनजान डिवाइस पर अतिरिक्त जांच: यदि आप किसी नए डिवाइस या स्थान से भुगतान करते हैं या बड़ा ट्रांजेक्शन करते हैं, तो सिस्टम स्वचालित रूप से अतिरिक्त सत्यापन (जैसे बायोमेट्रिक या इन-ऐप अप्रूवल) मांगेगा।

  • डिवाइस लिंक होना अनिवार्य: आपका UPI ऐप उसी फ़ोन और सिम कार्ड से बंधा (Device Bound) होना चाहिए।


3. सर्वर लोड और फ्रॉड नियंत्रण के लिए सीमाएँ (Daily Operational Limits)

  • बैलेंस चेक लिमिट: सिस्टम पर अनावश्यक लोड और ऑटोमेटेड बॉट गतिविधियों को रोकने के लिए एक ऐप पर प्रतिदिन अधिकतम 50 बार ही बैलेंस चेक करने की अनुमति है।

  • बैंक अकाउंट लिंकिंग: एक दिन में एक UPI ऐप से अधिकतम 25 बैंक खाते ही लिंक या फेच किए जा सकते हैं।

  • निष्क्रिय (Inactive) नंबर ब्लॉक: यदि कोई मोबाइल नंबर 90 दिनों से अधिक समय तक निष्क्रिय रहता है, तो सुरक्षा कारणों से उससे जुड़ा UPI खाता स्वतः डी-एक्टिवेट कर दिया जाएगा।


4. ऑटो-डेबिट (Auto-Pay) और EMI शेड्यूल

  • ऑफ़-पीक घंटों में प्रोसेसिंग: ऑटो-पे, ईएमआई (EMI) और सब्सक्रिप्शन आधारित डेबिट को दिन के पीक ऑवर्स (व्यस्त समय) में न प्रोसेस करके सुबह 10 बजे से पहले या रात 9:30 बजे के बाद प्रोसेस किया जाएगा, ताकि सर्वर क्रैश और फेलियर की समस्या न हो।


5. संस्थानों और बैंकों की जवाबदेही (Institutional Liability)

  • ग्राहकों की सुरक्षा को प्राथमिकता: यदि किसी बैंक या पेमेंट ऐप के सुरक्षा तंत्र में तकनीकी खामी के कारण धोखाधड़ी होती है, तो नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी सीधे संबंधित बैंक/पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म की होगी।

  • फिशिंग व सिम-स्वैप पर लगाम: AI आधारित फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए संदिग्ध और असामान्य ट्रांजेक्शन को रीयल-टाइम में ब्लॉक किया जाएगा।


💡 ग्राहकों के लिए सुझाव:

  1. कभी भी अपना UPI PIN, OTP या पासकोड किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

  2. केवल आधिकारिक ऐप स्टोर (Google Play Store / Apple App Store) से ही UPI ऐप अपडेट करें।

  3. साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

 

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