बागेश्वर के भटखोला से आई दिल दहला देने वाली खबर ने सिर्फ शिक्षा जगत को ही नहीं, बल्कि हमारी पूरी सामाजिक चेतना को हिलाकर रख दिया है। एक कर्तव्यनिष्ठ प्रभारी प्रधानाचार्य, श्री दयानंद टम्टा जी, जो सिर्फ नियमों का पालन कर रहे थे, उन्हें उन्हीं के अधीनस्थ (कनिष्ठ) कर्मचारी द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया।
यह केवल एक प्रशासनिक अधिकारी की हत्या नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और हमारे शांत पहाड़ों की समृद्ध संस्कृति की हत्या है।
इस घटना के बाद एक प्रबुद्ध समाज के नाते हमें खुद से कुछ कड़वे सवाल पूछने होंगे और एक कड़ा संदेश देना होगा:
1. कर्तव्य का पालन करना कब से गुनाह हो गया?
एक संस्थान का मुखिया वही करता है जो नियम कहते हैं। अगर किसी अनुशासनहीन कर्मचारी का वेतन रोका गया, तो वह उच्च अधिकारियों के आदेशानुसार था। यदि व्यवस्था से कोई शिकायत थी, तो बातचीत, पत्राचार या कानून का रास्ता खुला था। लेकिन कलम की जगह चाकू उठा लेना यह दिखाता है कि समाज में असहिष्णुता और सनकीपन किस हद तक हावी हो चुका है।
2. रीढ़ विहीन समाज की ओर बढ़ते कदम
अगर आज हम इस घटना पर चुप रहे, तो कल कोई भी ईमानदार अधिकारी, शिक्षक या प्रबंधक अनुशासन बनाए रखने की हिम्मत नहीं कर पाएगा। हर कोई नियम तोड़ने वालों के सामने झुकने को मजबूर होगा क्योंकि उसे अपनी जान का डर रहेगा। क्या हम एक ऐसा डरपोक और नियम-विहीन समाज बनाना चाहते हैं?
3. पहाड़ों की शांत वादियों पर एक काला धब्बा
उत्तराखंड की देवभूमि और यहाँ के शांत पहाड़ अपनी सादगी, मर्यादा और गुरु-शिष्य परंपरा के लिए जाने जाते हैं। शिक्षा के मंदिर में हुआ यह खूनी खेल हमारी उस धरोहर पर एक बदनुमा दाग है। एक सिरफिरे की गुंडागर्दी ने पूरी देवभूमि को शर्मसार किया है।
समाज और सिस्टम के लिए हमारा संदेश
> "जब रक्षक ही भक्षक बनने लगें और नियम लागू करने वालों की छाती पर चाकू घोंपे जाने लगें, तो समझ लीजिए कि समाज गहरे संकट में है। हमें जागना होगा।"
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* अपराधियों को मिले सख्त से सख्त सजा: ऐसे अराजक और हिंसक तत्वों के खिलाफ कानून को मिसाल पेश करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी या नागरिक अपने उच्चाधिकारी या किसी भी इंसान पर हाथ उठाने की सोच भी न सके।
* अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो: नियम और अनुशासन के रास्ते पर चलने वाले हर जिम्मेदार व्यक्ति को कार्यस्थल पर सुरक्षा का अहसास होना चाहिए।
* मानसिकता बदलने की जरूरत: हमें अपने समाज में संवाद और धैर्य को वापस लाना होगा। गुस्सा और अहंकार सिर्फ विनाश का रास्ता दिखाते हैं।
दिवंगत आत्मा श्री दयानंद टम्टा जी को भावभीनी श्रद्धांजलि। ईश्वर उनके परिवार को यह असह्यय दुख सहने की शक्ति दे।
आइए, इस दुखद घड़ी में हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम गुंडागर्दी और अराजकता के खिलाफ खड़े होंगे और अपनी व्यवस्था व समाज में अनुशासन का सम्मान बहाल करेंगे।

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