अल्मोड़ा, 20 जुलाई 2026। वर्षा काल का सदुपयोग करने और शिक्षकों की शिक्षण क्षमताओं को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आज विवेकानन्द इंटर कॉलेज, रानीधारा (अल्मोड़ा) में एक दिवसीय 'पंचपदीय शिक्षण पद्धति' प्रशिक्षण कार्यशाला का शानदार आयोजन किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से परिचित कराना और कक्षा-कक्ष के माहौल को अधिक प्रभावी, सहभागितापूर्ण व छात्र-केंद्रित बनाना था।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ भव्य शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि, विद्या भारती के आधार स्तंभ एवं विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य श्री मोहन सिंह रावल तथा विद्यालय के वर्तमान प्रधानाचार्य श्री आलम सिंह उनियाल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर अल्मोड़ा संकुल के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य— श्रीमती गोदावरी चतुर्वेदी, श्री देवेन्द्र नयाल एवं श्री नंदन सिंह गैलाकोटी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई।
पंचपदीय शिक्षण के 5 मुख्य चरणों पर विस्तृत चर्चा
कार्यशाला के विशेषज्ञ प्रशिक्षक और स्रोत व्यक्ति (Resource Person) श्री देवेश भट्ट ने शिक्षकों को पंचपदीय शिक्षण पद्धति पर आधारित पाठ योजना (Lesson Plan) की बारीकियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने इस पद्धति के पाँच मुख्य चरणों पर विशेष प्रकाश डाला:
* अधीति (Learning/Acquisition)
* बोध (Understanding/Comprehension)
* अभ्यास (Practice)
* प्रयोग (Application)
* प्रसार (Expansion/Expansion of Knowledge)
इसके साथ ही, उन्होंने गतिविधि-आधारित शिक्षण, समूह कार्य (Group Work) और स्थानीय परिवेश से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से शिक्षण को प्रभावी बनाने के व्यावहारिक तरीकों का सजीव प्रदर्शन भी किया।
120 से अधिक शिक्षकों ने लिया भाग
इस एक दिवसीय प्रशिक्षण में अल्मोड़ा संकुल के विभिन्न विद्यालयों से आए लगभग 120 प्रतिभागी शिक्षकों ने हिस्सा लिया। सभी शिक्षकों ने कार्यशाला में कराई गई विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया, उनका अभ्यास किया और शिक्षण के दौरान आने वाले अपने अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा किया।
सफल संचालन एवं समापन
इस पूरी कार्यशाला का कुशल संचालन श्री भूपेश पंत द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन सत्र में सभी प्रतिभागी शिक्षकों से मिले फीडबैक और सुझावों पर विस्तृत चर्चा की गई।
> आयोजकों का संदेश: कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रशासन और शिक्षा अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस प्रशिक्षण से शिक्षकों के कौशल में वृद्धि होगी, जिससे शिक्षण कार्य अधिक गुणवत्तापूर्ण, रोचक और छात्र-उपयोगी बनेगा। अधिकारियों ने सभी शिक्षकों से कार्यशाला में सीखी गई बातों को अपने-अपने स्कूल के कक्षा-कक्षों में अनिवार्य रूप से लागू करने का आह्वान किया।
वेब फास्ट न्यूज ब्यूरो।

एक टिप्पणी भेजें