अल्मोड़ा: ग्राम बजवाड़ के विश्वनाथ मंदिर में भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ शिव महापुराण, उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
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| Shiv Mahapuran Katha in Almora |
भक्ति और श्रद्धा के संगम के साथ संपन्न हुआ शिव महापुराण: अल्मोड़ा के विश्वनाथ मंदिर में उमड़ा जनसैलाब
अल्मोड़ा, 15 जून 2026: अल्मोड़ा के ग्राम बजवाड़ स्थित प्राचीन और आस्था के प्रमुख केंद्र विश्वनाथ मंदिर में पिछले 10 दिनों से चल रहा शिव महापुराण का पावन अनुष्ठान आज 11 वे दिन पूर्ण भक्ति और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। समापन के अवसर पर भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
धर्म और अध्यात्म का अनूठा समागम
कार्यक्रम के मुख्य कथा वाचक हरिद्वार से पधारे व्यास जी विपिन चंद्र पांडे ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के दौरान उन्होंने भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हुए कहा, "शिव महापुराण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक शिव की शरण में आता है, उसके सभी कष्टों का निवारण स्वयं महादेव करते हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि भगवान शिव कल्याण के प्रतीक हैं। शिव का नाम स्मरण मात्र ही मनुष्य को समस्त पापों से मुक्ति दिलाता है और उसे भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है। कथा के दौरान उनके साथ ग्राम खेरदा से पधारे पंडित हेम जोशी और पंडित अशोक जोशी एवं सेराघाट से आए बंशी बाबा की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया।
जन-भागीदारी और भक्ति का उल्लास
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| Shiv Mahapuran Katha in Almora |
शिव महापुराण के समापन समारोह में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और शहरों से बड़ी संख्या में भक्तजन पहुंचे। मंदिर परिसर में 'हर-हर महादेव' के जयघोष से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया था। कथा के समापन के पश्चात आयोजित विशाल भंडारे में उपस्थित सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में इनका भी रहा योगदान
इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में आयोजन समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय निवासियों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में अनेक स्थानीय लोगों ने व्यवस्थाओं का संचालन में सहयोग किया।
इस अवसर पर क्षेत्र के ग्रामीण, वरिष्ठ नागरिकों,स्थानीय गणमान्य व्यक्ति, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में युवा व बच्चे उपस्थित रहे।
इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि आस्था और विश्वास के केंद्र ऐसे कार्यक्रम न केवल धर्म का प्रचार करते हैं, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते हैं।





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