अल्मोड़ा। विकासखंड भैसियाछाना की ग्राम पंचायत खाकरी के अंतर्गत आने वाला 'तिमूरी' गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं, विशेषकर सड़क मार्ग से अछूता है। उत्तराखंड राज्य बने हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन तिमूरी गांव के ग्रामीणों के लिए विकास अभी भी एक सपना बना हुआ है।
दस्तावेजों में कैद होकर रह गई सड़क परियोजना
ग्रामीणों ने बताया कि 'कषाण बैंड से अगेरा-तिमूरी सड़क मार्ग' को तत्कालीन सरकार के समय ही स्वीकृति मिल गई थी। इसके लिए बजट और सर्वेक्षण की प्रक्रिया भी पूरी की गई, लेकिन विडंबना यह है कि यह सड़क आज भी विभागीय फाइलों के जाल में उलझकर रह गई है। वर्षों बीत जाने के बाद भी सड़क निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो सका है।
जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर ग्रामीण
सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को निकटतम बाजार तक पहुँचने के लिए लंबी और दुर्गम पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह पगडंडियां और भी खतरनाक हो जाती हैं, जिससे फिसलन भरी चढ़ाई और ढलान पर जान जोखिम में डालकर चलना ग्रामीणों की मजबूरी बन गई है। वृद्धों, बीमारों और स्कूली बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टकारी है।
सुविधाओं के अभाव में पलायन को मजबूर ग्रामीण
रीठागाड़ी दगड़ियों संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रताप सिंह नेगी ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि केवल तिमूरी गांव ही नहीं, बल्कि पूरा रीठागाड़ क्षेत्र सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बदहाली के दौर से गुजर रहा है। नेगी ने कहा, "राज्य बनने के बाद से अब तक कई सरकारें आईं और गईं, सभी ने चुनाव के समय सड़क बनाने के बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन सत्ता में आने के बाद ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन ही मिले।"
सड़क के अभाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण इस क्षेत्र से ग्रामीणों का बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। संघर्ष समिति ने सरकार और जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

एक टिप्पणी भेजें