भैंसियाछाना (अल्मोड़ा):
उत्तराखंड राज्य गठन के दशकों बाद भी पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विकास खंड भैंसियाछाना का पतलचौरा गांव आज भी मुख्य सड़क मार्ग से वंचित है। 'कनारीछीना-बिनूक-पतलचौरा' 5 किलोमीटर सड़क मार्ग पिछले 10 वर्षों से केवल फाइलों और कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है।
सड़क सुविधा न होने का खमियाजा ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है। हाल ही में पतलचौरा गांव निवासी कुंवर राम की तबीयत अचानक अत्यधिक खराब हो गई। गांव में सड़क न होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को लाचार होकर उन्हें डोली के सहारे कई किलोमीटर पैदल चलकर नजदीकी बाजार कनारीछीना पहुंचाना पड़ा। डोली से मरीज को अस्पताल पहुंचाने वालों में किशन राम, बहादुर राम, प्रकाश राम, इंद्र कुमार, गोपाल राम, हिमांशु कुमार, दीपक कुमार, सूरज राम, गोकुल राम और जगदीश राम आदि ग्रामीण शामिल रहे।
10 साल का लंबा इंतजार और प्रशासनिक उपेक्षा
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2016 में तत्कालीन विधायक रघुनाथ सिंह चौहान ने इस सड़क मार्ग को स्वीकृति प्रदान की थी। इसके बाद वर्ष 2021 में भू-विभाग द्वारा अर्थ टेस्टिंग (मृदा परीक्षण) का कार्य पूरा किया गया तथा वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी प्राप्त हो चुका है। तमाम विभागीय प्रक्रियाओं और अनापत्तियों के बावजूद सड़क निर्माण का कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो सका।
रीठागाड़ी दगड़ियों संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रताप सिंह नेगी ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों से ग्रामीण इस सड़क के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन फाइल एक मेज से दूसरी मेज तक ही घूम रही है।
चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोशित पतलचौरा, चिमचुआ रीम, पिपलखेत और कनारी गांव के ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करने के लिए बाध्य होंगे।



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