आज हम आपको एक ऐसे 'साइको किलर' की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसने साधारण दिखने के मुखौटे के पीछे आठ मौतों का खौफनाक मंजर छिपा रखा था। इसका नाम है— राम सहाय जायसवाल।छत्तीसगढ़ के बालोदबाजार-भाटापारा जिले का है।
चेहरे पर मुस्कान, जेब में जहर
बाहर से देखने में राम सहाय बिल्कुल साधारण और सीधा-सादा इंसान लगता था, लेकिन अंदर से वह इतना 'तेज और शातिर' था कि किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई। राम सहाय किसी भी बड़ी साजिश का हिस्सा नहीं था, उसका मकसद सिर्फ एक था— हिसाब बराबर करना।
उसकी मारने की वजहें सुनकर आप दंग रह जाएंगे। किसी ने ताना मार दिया, तो किसी ने उधार के पैसे मांग लिए, किसी ने किसी ज़माने में गाली दे दी थी, तो किसी ने सीधे मुँह बात नहीं की थी। राम सहाय ने इन छोटी-छोटी बातों की एक 'हिट लिस्ट' बनाई और शुरू कर दिया एक सिलसिला, जिसे रोक पाना किसी के बस में नहीं था।
'शराब पार्टी' और मौत का खेल
राम सहाय ने इस खूनी खेल के लिए बेहद शातिर तरीका चुना। वह एक केमिस्ट से 'चूहे मारने की दवा' (बोरेक्स पाउडर) खरीदता। फिर अपने शिकार को शराब पार्टी पर बुलाता और उसी शराब में जहर घोलकर उन्हें मौत के घाट उतार देता।
इस दरिंदे ने किन-किन लोगों को निशाना बनाया?
6 फरवरी: गाली देने वाले बद्री को रास्ते से हटाया।
20 फरवरी: नाव में हुए मामूली झगड़े पर बुठालू को निपटाया।
12 मार्च: पत्नी पर बुरी नज़र रखने के शक में छत्तूराम का काम तमाम किया।
20 मार्च: ज़मीनी रंजिश के चलते बुधराम को मौत दी।
31 मार्च: पुरानी गाली का बदला विनोद को जान देकर चुकाना पड़ा।
28 अप्रैल: तंत्र-मंत्र करने वाले गजानंद का खात्मा।
29 अप्रैल: उधार के पैसे मांगना चैतूराम के लिए आखिरी गलती साबित हुई।
14 मई: ताने मारने वाले महेतरू राम को भी नहीं बख्शा।
पुलिस का शक और 'राम' का सच
जब एक ही गाँव में आठ लोग अलग-अलग मौकों पर 'बेवड़े' बनकर मर रहे थे, तब पुलिस का माथा ठनका। हर बार मरने वाला नशे में होता था और हर बार उन्हें अस्पताल ले जाने वाला वही चेहरा— राम सहाय!
पुलिस ने जैसे ही सख्ती की और राम सहाय के 'चबूतरे पर चार लट्ठ' जमाए, तो सारा राज खुल गया। राम सहाय कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि एक साइकोपैथ निकला, जो अपनी मानसिक कुंठाओं को शांत करने के लिए लोगों को मौत की नींद सुलाकर मजे ले रहा था।
सबक क्या है?
यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लग सकती है, लेकिन यह हकीकत है। कभी-कभी जिसे हम सबसे करीबी या साधारण समझते हैं, वही हमारे आसपास के सबसे बड़े खतरे हो सकते हैं।
सावधान रहें, सुरक्षित रहें और अपनों का ख्याल रखें!
(क्या आपको भी लगता है कि ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए पुलिस को और सतर्क होना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।)

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