एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत 150 बांज के पौधों का रोपण
भाकृअनुप – विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के निर्देशानुसार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर 16 जुलाई 2026 को सर्वप्रथम "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के अंतर्गत संस्थान के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र, हवालबाग में बांज वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रभारी निदेशक डॉ. बी. एम. पाण्डेय की गरिमामयी उपस्थिति में संस्थान के वैज्ञानिकों, तकनीकी, प्रशासनिक एवं सहायक कर्मचारियों सहित 54 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। वृक्षारोपण अभियान के दौरान प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र स्थित कैंटीन क्षेत्र के निकट स्थानीय बांज के 150 पौधों का रोपण किया गया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय बांज वनों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन को बढ़ावा देना है। बांज वृक्ष हिमालयी क्षेत्र में मृदा एवं जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, वनाग्नि के जोखिम को कम करने, पशुओं के लिए पौष्टिक हरे चारे की उपलब्धता, ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने तथा पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों ने रोपित पौधों के संरक्षण एवं उनके समुचित संवर्धन का संकल्प लिया तथा पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस वृक्षारोपण अभियान का समन्वय डॉ. आर. पी. मीणा द्वारा "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के अंतर्गत किया गया।
*स्थाापना दिवस का सीधा प्रसारण*
भाकृअनुप के 98वें स्थापना दिवस पर नई दिल्ली में चल रहे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण संस्थान के हवालबाग प्रक्षेत्र में किया गया जिसमें कार्यकारी निदेशक डॉ. बृज मोहन पाण्डेय तथा संस्थान के वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रशासनिक एवं सहायक वर्ग सहित कुल 33 कार्मिकों ने प्रतिभाग किया। सभी कार्मिकों ने अत्यन्त रूचि के साथ इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा। इस अवसर पर दिल्ली में चल रहे कार्यक्रम के दौरान विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, अल्मोड़ा का मैसर्स पराशर एग्रोटेक बायो प्रा. लिमिटेड, मोहन कुंज अपार्टमेंट, वाराणसी, उत्तर प्रदेश के साथ वी. एल. मक्का शेलर के निर्माण तथा विक्रय के लिए समझौता पत्र भी निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त द्वारा मैसर्स पराशर एग्रोटेक बायो प्रा. लिमिटेड के बिजनेस डेवलपमेंट एग्जीक्यूटिव श्री कोस्तुभ पाण्डे को सौंपा गया। वी. एल. मक्का शेलर, जो वजन में हल्का (54 किग्रा) तथा दो लोगों द्वारा आसानी से एक खेत से दूसरे खेत तक ले जाया जा सकता है, की थ्रेशिंग क्षमता 300 किग्रा/घंटा और कार्यक्षमता 98 प्रतिशत है। कम कीमत (रू. 20,500/-) का होने के कारण यह छोटे किसानों के लिए किफायती है तथा कृषकों के श्रम और समय को बचाता है जिसके फलस्वरूप कार्य क्षमता बढ़ती है। आशा है कि छोटे किसान इसके सरल प्रयोग को देखते हुए मक्का की खेती की ओर आकर्षित होंगे और अपनी आय में वृद्धि कर सकेंगे।
*कृषक-वैज्ञानिक संवाद का आयोजन*
इस अवसर पर संस्थान में एक कृषक-वैज्ञानिक संवाद का भी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में हवालबाग ब्लॉक के घनेली, कनालबूंगा, हवालबाग, ज्योली, कटारमल एवं उडियारी ग्राम सभाओं के 20 कृषकों ने भाग लिया। संवाद के दौरान किसानों ने अपनी खेती-बाड़ी से जुड़ी प्रमुख समस्याओं, विशेषकर जंगली जानवरों से फसल क्षति, सिंचाई जल की कमी तथा समय पर सब्जी फसलों के बीज उपलब्ध न होने की समस्या साझा की। किसानों ने यह भी बताया कि मशरूम उत्पादन एवं मधुमक्खी पालन जैसे आजीविका संवर्धन के विकल्प उनके लिए उपयोगी हो सकते हैं। संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और समाधान हेतु आवश्यक सुझाव दिए। साथ ही किसानों को अपने गांव से 10-15 प्रगतिशील कृषकों के दल के साथ संस्थान भ्रमण कर नवीन तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए आमंत्रित किया गया। संस्थान की ओर से यथासंभव कृषि निवेश उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया। उक्त गावों में से सर्वोत्तम कार्य करने वाले गांव को अगले वर्ष पुरस्कृत करने की बात भी कही गयी। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के एससीएसपी कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. गौरव वर्मा तथा फसल उत्पादन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बी.एम. पांडेय द्वारा किया गया। उपस्थित किसानों ने इस पहल के लिए संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया।

एक टिप्पणी भेजें