वैश्विक शिखर सम्मेलन में 'हरित ऊर्जा' पर ऐतिहासिक सहमति।
जेनेवा, 17 जून 2026: आज जेनेवा में संपन्न हुए तीन दिवसीय 'अंतर्राष्ट्रीय जलवायु और ऊर्जा शिखर सम्मेलन' में दुनिया के प्रमुख देशों ने वर्ष 2040 तक वैश्विक कार्बन उत्सर्जन को 60% तक कम करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
समझौते की मुख्य विशेषताएं:
- नवीकरणीय ऊर्जा निवेश: विकसित और विकासशील देशों ने मिलकर अगले पांच वर्षों में हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 500 अरब डॉलर के कोष की स्थापना की है।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: संपन्न राष्ट्र, तकनीकी रूप से विकासशील देशों को सौर, पवन और हाइड्रोजन ऊर्जा के निर्माण में सहायता और आधुनिक तकनीक साझा करने के लिए सहमत हुए हैं।
- जीवाश्म ईंधन का चरणबद्ध अंत: सभी सदस्य देशों ने कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों को धीरे-धीरे बंद करने और उनके स्थान पर स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को अपनाने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की है।
"यह समझौता मात्र कागजी नहीं, बल्कि पृथ्वी के भविष्य के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता है। आज हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित मार्ग प्रशस्त किया है," सम्मेलन के अध्यक्ष ने समापन भाषण में कहा।
वैश्विक प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे "मानवता के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़" बताया है। वहीं, विभिन्न पर्यावरणीय संगठनों ने इस कदम को सराहते हुए कहा है कि अब पूरी जिम्मेदारी इन समझौतों के सख्त कार्यान्वयन (Strict Implementation) पर निर्भर करेगी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैश्विक निर्णय के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) तथा अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से उछाल आ सकता है।

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