"खेत बचाओ अभियान": अल्मोड़ा के किसानों को मिली आधुनिक और टिकाऊ खेती की नई दिशा
अल्मोड़ा: भाकृअनुप - विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (VPKAS), अल्मोड़ा द्वारा चलाए जा रहे केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी "खेत बचाओ अभियान" ने पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों में नई उम्मीद जगाई है। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के मार्गदर्शन में 1 जून 2026 से जारी इस विशेष अभियान का उद्देश्य किसानों को न केवल आधुनिक खेती की तकनीकें सिखाना है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल खेती की ओर प्रेरित करना भी है।
क्या है इस अभियान का मुख्य उद्देश्य?
अभियान के अंतर्गत वैज्ञानिक लगातार विभिन्न गांवों का दौरा कर रहे हैं। इसका मुख्य फोकस निम्नलिखित बिंदुओं पर है:
टिकाऊ और जलवायु अनुकूल खेती: बदलते मौसम के अनुसार फसलों का चयन।
प्राकृतिक खेती: जीवामृत, घनजीवामृत जैसे प्राकृतिक घोलों का उपयोग और गोबर की खाद का वैज्ञानिक प्रबंधन।
मृदा स्वास्थ्य: मृदा परीक्षण और संतुलित पोषण के माध्यम से भूमि की उपजाऊ शक्ति को लंबे समय तक बनाए रखना।
हवालबाग और स्याल्दे में वैज्ञानिकों ने साझा किए गुर
हाल ही में हवालबाग के चाण, रौन, डाल और जुड़कफून गांवों में आयोजित गोष्ठियों में 63 से अधिक किसानों ने भाग लिया। वहीं, स्याल्दे के पथरखोला गांव में भी 40 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।
प्रमुख समाधान और किसान-वैज्ञानिक संवाद:
वन्यजीवों से सुरक्षा: मंडुवा की फसल को बंदरों और जंगली सूअरों से बचाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कीट प्रबंधन: कुरमुला जैसे कीटों के नियंत्रण के लिए 'वीएल लाइट ट्रैप' और 'बेसिलस सीरियस' के उपयोग की सलाह दी गई।
सरकारी योजनाओं का लाभ: किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान सम्मान निधि और उत्तराखंड सरकार की बागवानी योजनाओं के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही, इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए [किसान आईडी/पंजीकरण] की प्रक्रिया को समयबद्ध पूरा करने के लिए प्रेरित किया गया।
किसानों की मांग और भविष्य की राह
कार्यक्रम में शामिल ग्राम प्रधानों और किसानों ने संस्थान के वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने अपने गांवों को "मॉडल प्रक्षेत्र ग्राम" के रूप में विकसित करने और जंगली जानवरों से फसल सुरक्षा के लिए स्थायी फेंसिंग समाधान की मांग की है।
यह कार्यक्रम डॉ. नवीन गहत्याड़ी, डॉ. अमित ठाकुर, डॉ. देवेंदर शर्मा, डॉ. प्रकाश घासल, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. राजेश खुल्बे और डॉ. बृजमोहन पांडेय की टीम के कुशल समन्वय में संपन्न हुआ।
यदि आप भी पर्वतीय खेती में नए तकनीकी समाधान अपनाना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या अनुसंधान संस्थान से संपर्क करें।


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