अल्मोड़ा/हल्द्वानी: अल्मोड़ा की संस्कृति और कला के पर्याय, सुप्रसिद्ध होली गायक, कुशल तबला वादक और संगीत शिक्षक धीरूभाई (धीरू उस्ताद) जी इस समय जीवन की सबसे कठिन जंग लड़ रहे हैं।
दशकों तक अपनी कला और संगीत से अल्मोड़ा की धरती को गुंजायमान करने वाले धीरू उस्ताद आज खुद इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
संस्कृति के प्रति समर्पण
धीरू उस्ताद जी का नाम अल्मोड़ा के सांस्कृतिक मंचों की पहचान रहा है। विशेष रूप से धारानौला रामलीला कमेटी के साथ उनका दशकों पुराना और अटूट रिश्ता रहा है। उन्होंने न केवल रामलीला के मंच पर अपनी बेहतरीन कलाकारी दिखाई है, बल्कि ढोलक-तबले की थाप और होली की पारंपरिक गायकी से नई पीढ़ी को भी संगीत की शिक्षा दी है। अल्मोड़ा के तमाम मंचों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भूमिका हमेशा रही है।
गंभीर बीमारी और अस्पताल में संघर्ष
आज वही हाथ, जो कभी तबले पर ताल छेड़ते थे, वे आज उपचार के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लगा रहे हैं। धीरू उस्ताद जी के फेफड़ों में पानी भर गया है, जिसके कारण एक फेफड़ा पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है और दूसरा भी आधा ही काम कर पा रहा है। किडनी और लिवर की गंभीर समस्याओं ने उनके स्वास्थ्य को बेहद नाजुक मोड़ पर ला खड़ा किया है। अल्मोड़ा के अस्पतालों से होते हुए अब वे हल्द्वानी के नीलकंठ अस्पताल में जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
परिवार की अपील
कलाकार का जीवन अक्सर अभावों में बीतता है, और आज वही स्थिति उनके परिवार के सामने है। इलाज का खर्च उनके सामर्थ्य से बाहर हो चुका है। उनकी धर्मपत्नी ने भावुक होते हुए नगर के प्रबुद्धजनों, कलाप्रेमियों और उनके शिष्यों से सहायता की अपील की है।
कैसे करें सहयोग?
धीरू उस्ताद जी जैसे कलाकार का स्वस्थ होना अल्मोड़ा की संस्कृति के लिए आवश्यक है। आपसे निवेदन है कि अपनी क्षमता के अनुसार उनके परिवार की आर्थिक मदद करें।
Google Pay Number: 8864976668
खाताधारक: काजल भारती (धीरू उस्ताद जी की बेटी)
आपकी छोटी सी मदद उनके जीवन की रक्षा कर सकती है। कृपया इस खबर संदेश को अधिक से अधिक साझा करें ताकि यह उन लोगों तक पहुँच सके जो धीरू उस्ताद जी की कला के प्रशंसक रहे हैं।

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