संयोजक बिट्टू कर्नाटक के कुशल नेतृत्व में हर वर्ष भव्यता और सांस्कृतिक गरिमा के नए आयाम स्थापित कर रही कर्नाटक खोला की रामलीला
अल्मोड़ा
श्री भुवनेश्वर महादेव मंदिर एवं रामलीला समिति कर्नाटक खोला की रामलीला के पंचम दिवस पर भगवान श्रीराम के वनगमन,सुमंत विलाप,केवट प्रसंग, दशरथ श्रवण कुमार प्रसंग और राजा दशरथ के प्राण त्यागने के मार्मिक दृश्यों का भावपूर्ण मंचन किया गया।कलाकारों के सजीव अभिनय, प्रभावशाली संवादों और संवेदनशील प्रस्तुतियों ने रामलीला देखने पहुंचे दर्शकों को भावविभोर कर दिया। विशेष रूप से सुमंत,युवा दशरथ और श्रवण कुमार के विलाप ने दर्शकों को भावुक कर दिया।इन कलाकारों के अभिनय पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहना की।कर्नाटक खोला की रामलीला अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, अनुशासित आयोजन और उत्कृष्ट मंचन के लिए क्षेत्र में विशेष पहचान बना रही है। रामलीला के संयोजक बिट्टू कर्नाटक के नेतृत्व में समिति प्रत्येक वर्ष आयोजन को और अधिक भव्य,आकर्षक एवं व्यवस्थित बनाने के लिए प्रयासरत रहती है।धार्मिक आस्था के साथ लोकसंस्कृति, पारंपरिक रंगमंच और भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का यह प्रयास रामलीला को विशिष्ट पहचान प्रदान कर रहा है। आयोजन की निरंतर बढ़ती भव्यता और कलाकारों की प्रस्तुतियां समिति की मेहनत, समर्पण तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
पंचम दिवस की लीला का शुभारंभ मुख्य अतिथि अपर जिला जज फैमिली कोर्ट अंजू श्री जुयाल,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनामिका सिंह,न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज नवल सिंह बिष्ट,सिविल जज उदीसा तथा अल्मोड़ा के सीओ बलवंत सिंह रावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।अतिथियों ने कहा कि रामलीला को केवल मनोरंजन का साधन नहीं समझना चाहिए बल्कि भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र,आदर्शों, मर्यादा,त्याग और कर्तव्यनिष्ठा से प्रेरणा लेकर उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।उन्होंने नशामुक्त रामलीला के आयोजन की सराहना करते हुए समिति के संरक्षक एवं संयोजक बिट्टू कर्नाटक की प्रशंसा की और आयोजन के सफल नेतृत्व के लिए बधाई दी।पंचम दिवस की लीला में कोमल जोशी ने राम,गायत्री तिवारी ने लक्ष्मण, वैष्णवी जोशी ने सीता, गौरव कांडपाल ने भरत, मिष्टी मेहता ने शत्रुघ्न, अमर बोरा ने राजा दशरथ, दीपक पांडे ने सुमंत और अशोक बनकोटी ने निषादराज की भूमिका निभाई। वहीं अनिल जोशी, राहुल जोशी, सुनीता बगड़वाल और आशा मेहता ने केवट परिवार की भूमिका निभाई। मीनाक्षी जोशी कौशल्या, दिव्या कांडपाल कैकेयी, निकन्द्रया सुमित्रा, काव्या अल्मियां मंथरा, कपिल मल्होत्रा युवा दशरथ और कमल जोशी श्रवण कुमार के पात्र में नजर आए।
वनवासियों की भूमिका में माही, जाह्नवी, हर्षिता बगड़वाल, रिया और खुशी ने अभिनय किया, जबकि दो बाल कलाकारों ने श्रवण कुमार के माता-पिता की भूमिका निभाई। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से प्रसंगों को जीवंत बना दिया। विशेष रूप से सुमंत का श्रीराम से वियोग, श्रवण कुमार प्रसंग और युवा दशरथ के संवादों ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। दर्शकों के साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी कलाकारों को खूब सराहना मिली।कर्नाटक खोला की रामलीला में प्रत्येक वर्ष मंचन की गुणवत्ता, व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। संयोजक बिट्टू कर्नाटक के मार्गदर्शन में समिति का प्रयास है कि नई पीढ़ी भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित होने के साथ ही अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ी रहे। धार्मिक आयोजन को नशामुक्त स्वरूप में संपन्न कराने की पहल भी इसकी विशेषता रही है। स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को मंच देने और दर्शकों को रामकथा के भावनात्मक प्रसंगों से जोड़ने में समिति की भूमिका उल्लेखनीय रही है।इस अवसर पर रोहित कार्की, जगदीश चंद्र तिवारी, आनंद सिंह नयाल, भुवन चंद्र कर्नाटक, लीलाधर कांडपाल, पूरन चंद्र तिवारी, मथुरा दत्त कांडपाल, रमेश चंद्र जोशी, बद्री प्रसाद कर्नाटक, कमलेश कर्नाटक, कैलाश चंद्र तिवारी, जीवन चंद्र तिवारी, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, चंद्रशेखर सती, मनीष तिवारी, अनिल रावत, हंसा दत्त कर्नाटक, योगेश जोशी, गौरव कांडपाल, दिनेश वृजेश पांडे, नंदन बगड़वाल, हेम पांडे, देवेंद्र गोस्वामी और अभिषेक तिवारी सहित बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन भावना मल्होत्रा ने किया।

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