कुमाऊँ विश्वविद्यालय: रमेरिका ओप्लीगर को ग्रामीण मोबाइल कॉमर्स और 'डिजिटल सशक्तिकरण' पर शोध के लिए मिली Ph.D.

 



कुमाऊँ विश्वविद्यालय द्वारा रमेरिका ओप्लीगर को वाणिज्य विषय में Ph.D. (डॉक्टरेट) की उपाधि से सम्मानित किया गया है। उनका शोध कार्य उत्तराखंड के पर्वतीय और अवसंरचना-सीमित ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल कॉमर्स (M-Commerce) के प्रभाव, सामाजिक-आर्थिक बदलाव और सुशासन की संभावनाओं पर केंद्रित है।

शोध का विषय और मार्गदर्शन

शोध शीर्षक: "A Study on Rural Consumers' Perceptions Towards the Impact of Mobile Commerce in the Kumaon Region of Uttarakhand" (उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में मोबाइल कॉमर्स के प्रभाव के प्रति ग्रामीण उपभोक्ताओं की धारणाओं का एक अध्ययन)।

शोध निर्देशक: यह शोध कार्य प्रो० सी०एस० जोशी (अध्यक्ष-वाणिज्य विभाग, पी०एन०जी०पी०जी० कालेज, रामनगर) के कुशल मार्गदर्शन में पूर्ण हुआ।

शोध के मुख्य निष्कर्ष: डिजिटल पहुँच से डिजिटल सुशासन तक

यह अध्ययन केवल ऑनलाइन खरीद-बिक्री या डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि डिजिटल तकनीक ग्रामीण समाज के सामाजिक, आर्थिक और सार्वजनिक जीवन को कैसे बदल रही है।

बहुआयामी उपयोग: ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल कॉमर्स अब शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, बाजार की दरों, वित्तीय लेन-देन, सामाजिक संपर्क और सरकारी सेवाओं (e-Governance) तक पहुँच का मुख्य जरिया बन चुका है।

समय और लागत की बचत: इसके माध्यम से वित्तीय समावेशन, आजीविका के नए अवसरों और समय व लागत की बचत से ग्रामीण नागरिक केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि डिजिटल विकास के सक्रिय सहभागी बन रहे हैं।

डिजिटल विस्तार में प्रमुख चुनौतियाँ

शोध में ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल कॉमर्स के पूर्ण विस्तार में आने वाली मुख्य बाधाओं को भी रेखांकित किया गया है:

कमजोर नेटवर्क कनेक्टिविटी

डिजिटल साक्षरता और तकनीकी जागरूकता की कमी

इंटरनेट और स्मार्ट उपकरणों की लागत

साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताएँ और सेवाओं की जटिलता

नीति-निर्माण (Policy Making) के लिए प्रमुख सुझाव

"ग्रामीण डिजिटल विकास के लिए केवल इंटरनेट देना ही काफी नहीं है, बल्कि विश्वसनीय इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप सेवाएं होना अनिवार्य है।"

ग्राम स्तर पर प्रशिक्षण: ग्राम स्तर पर नियमित डिजिटल साक्षरता और सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँ।

स्थानीय भाषा में सेवाएँ: ऐप्स और डिजिटल सेवाओं का इंटरफेस सरल तथा स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध हो।

सरकारी सेवाओं का एकीकरण: सरकारी योजनाओं को उन मोबाइल माध्यमों से बेहतर तरीके से जोड़ा जाए, जिनका ग्रामीण नागरिक रोजमर्रा में उपयोग करते हैं।

स्थानीय तकनीकी सहायता: गाँव के स्तर पर ही त्वरित तकनीकी सहायता प्रणाली विकसित की जाए।

6 राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित, दिग्गजों ने दी बधाई

रमेरिका ओप्लीगर के इस शोध कार्य के अंतर्गत 06 शोध पत्र विभिन्न प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं (Journals) में प्रकाशित हो चुके हैं।

उनकी इस बड़ी उपलब्धि पर प्रो० अतुल जोशी (विभागाध्यक्ष एवं डीन वाणिज्य, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल), प्रो० आर०सी० डंगवाल (पूर्व विभागाध्यक्ष एवं डीन, एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय), प्रो० एम०सी० पाण्डे (प्राचार्य, रामनगर कॉलेज), तथा प्रो० एन०एस० बनकोटी (प्राचार्य, एमबीपीजी कॉलेज, हल्द्वानी) सहित उच्च शिक्षा क्षेत्र के अनेक प्राध्यापकों ने बधाई दी।

रमेरिका ओप्लीगर ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता, परिवारजनों और अपने मार्गदर्शक गुरुजनों को दिया है।

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