अल्मोड़ा: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अल्मोड़ा, मोहम्मद याकूब की अदालत ने एक आपराधिक मामले में अभियुक्तगण को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादिनी गोदावरी देवी ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि 11 जून 2025 की रात्रि को अभियुक्तगणों ने उनके डोबा स्थित घर में आकर तोड़-फोड़ की, लाठी-डंडों से दरवाजे तोड़ने की कोशिश की और पुलिस में जाने पर जिंदा जलाने की धमकी दी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अभियुक्तगण उनसे 20-20 लाख रुपये और घर व संपत्ति उनके नाम करने की मांग कर रहे थे।
वादिनी की इस रिपोर्ट के आधार पर राजस्व पुलिस क्षेत्र डोबा में मुकदमा पंजीकृत किया गया। विवेचना के उपरांत, न्यायालय ने अभियुक्तों के विरुद्ध बीएनएसएस की धारा 324(2), 351(3) व 352 के तहत अपराध का संज्ञान लिया। जब न्यायालय द्वारा अभियुक्तों को आरोप सुनाए गए, तो उन्होंने आरोपों से इनकार किया।
मामले की सुनवाई के दौरान वादिनी गोदावरी देवी की मृत्यु हो गई, जिसके पश्चात् अभियोजन पक्ष ने उनके पुत्र सुरेंद्र सिंह महिपाल और विवेचक पटवारी (राजस्व पुलिस क्षेत्र डोबा) को गवाह के रूप में प्रस्तुत किया तथा दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर अभियुक्तों को सजा देने की मांग की।
वहीं, अभियुक्तों ने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों को झूठा करार दिया और अपने बचाव में माननीय न्यायालयों के दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत किए।
माननीय न्यायालय ने पत्रावली, दस्तावेजी प्रमाणों और गवाहों के बयानों का गहन अनुशीलन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के विरुद्ध आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसके परिणामस्वरूप, न्यायालय ने अभियुक्त राजेंद्र सिंह महिपाल और नरेंद्र सिंह महिपाल को सभी आरोपों से बरी (दोषमुक्त) कर दिया।
अभियुक्तगण की ओर से अधिवक्ता रोहित कार्की ने प्रभावी पैरवी की।

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