‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत अल्मोड़ा के पांच गांवों में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित


विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के सफल निर्देशन में चल रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत जनपद के धौलादेवी विकासखंड के पांच और ताड़ीखेत विकासखंड के एक गांव में किसान जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए।

 इन कार्यक्रमों में कुल 116 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 41 पुरुष एवं 75 महिलाएं शामिल रहीं।

विकासखंड धौलादेवी के मनिआगर, बीना, सेला और तोली गांव में आयोजित कार्यक्रम में 75 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 21 पुरुष और 54 महिलाएं थीं। कार्यक्रम में डॉ. महेन्द्र सिंह भिंडा, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. कामिनी बिष्ट और डॉ. नवीन चन्द्र ने किसानों को मृदा परीक्षण, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैव उर्वरकों एवं जैव कीटनाशकों के उपयोग, मल्चिंग, पंक्तियों में बुवाई, मिश्रित खेती, फसल विविधीकरण, तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती की तकनीकों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में महिलाओं को मिट्टी की सेहत बनाए रखने और मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों के अनुसार उर्वरक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, किसान क्रेडिट कार्ड तथा मौसम आधारित फसल बीमा योजना जैसी सरकारी पहलों से भी अवगत कराया गया। किसानों ने बंदरों, जंगली सूअरों एवं आवारा पशुओं से फसल नुकसान, सर्दियों में सिंचाई की कमी तथा सब्जियों के उचित दाम न मिलने जैसी समस्याएं प्रमुख रूप से रखीं और वैज्ञानिकों ने फेंसिंग योजना तथा अन्य संरक्षण उपायों की जानकारी दी।

ताड़ीखेत विकासखंड के पजिना गांव में आयोजित किसान गोष्ठी में 41 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 20 पुरुष और 21 महिलाएं थीं। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. आर. पी. मीणा ने किया। किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा एवं जल संरक्षण, एल-नीनो के वर्षा वितरण पर प्रभाव, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, जल के कुशल उपयोग तथा जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। किसानों ने अनियमित वर्षा, जंगली जानवरों से नुकसान, मृदा उर्वरता तथा गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्धता जैसी समस्याएं रखीं।

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