अल्मोड़ा, 04 जुलाई 2026: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत कार्यरत विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (VPKAS), अल्मोड़ा ने आज अपना 103वाँ स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया।
यह आयोजन संस्थान की समृद्ध विरासत और पर्वतीय कृषि के क्षेत्र में इसकी क्रांतिकारी उपलब्धियों के जश्न के रूप में मनाया गया।
कार्यक्रम की झलकियाँ
दिवस की शुरुआत संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के नेतृत्व में पूजा-अर्चना और स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। मुख्य समारोह में संस्थान की विशिष्ट उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
संस्थान की प्रमुख उपलब्धियां
अपने संबोधन में निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने संस्थान की प्रगति पर प्रकाश डाला:
नई किस्में: 'वीएल त्रिपोषी' और 'वीएल सुपोषिता' (बायो-फोर्टिफाइड मक्का), 'वीएल मंडुआ 410' और 'वीएल लहसुन 2' का विकास।
तकनीकी नवाचार: 'वीएल मक्का शेलर' जैसी प्रौद्योगिकियों का व्यवसायीकरण।
फसल प्रणाली: सोयाबीन-गेहूं प्रणाली में 52 वर्षों के दीर्घकालिक प्रयोगों से पैदावार में 4.6 गुना वृद्धि।
जन-भागीदारी: 'खेत बचाओ अभियान' के जरिए 3,000 से अधिक किसानों को सीधे प्रशिक्षित और लाभान्वित किया गया।
विशेषज्ञों का मंथन
मुख्य अतिथि डॉ. संजय कुमार (अध्यक्ष, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली) ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर संस्थान की तुलना नालंदा जैसे विश्वप्रसिद्ध केंद्रों से की। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी 'जैविक पूंजी' की सदी है और अल्मोड़ा संस्थान इस दिशा में देश का मार्गदर्शन कर रहा है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अवलोकितेश्वर सेन ने 'पद्मभूषण प्रो. बोशी सेन स्मृति व्याख्यान' के माध्यम से संस्थान के संस्थापक प्रो. बोशी सेन के जीवन दर्शन और विज्ञान के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित किया।
सम्मान और समझौते
स्थापना दिवस के अवसर पर कई महत्वपूर्ण कार्य हुए:
प्रकाशन विमोचन: 'कृषक दिग्दर्शिका 2026-27' का विमोचन।
पुरस्कार: प्रगतिशील किसानों और उत्कृष्ट शोध कार्य करने वाले वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया।
एमओयू (MoU): 'वीएल मक्का शेलर' के विपणन हेतु 'मैसर्स पराशर एग्रोटेक बायो प्राइवेट लिमिटेड' के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
हिमालयी कृषि का भविष्य: विशेष पैनल चर्चा
अपराह्न सत्र में "हिमालयी कृषि का पुनरुद्धार: प्रौद्योगिकी-आधारित परिवर्तन का रोड मैप" विषय पर एक विशेषज्ञ पैनल चर्चा आयोजित की गई। 13 से अधिक प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों के समन्वय पर मंथन किया।
यह स्थापना दिवस न केवल संस्थान के अतीत को याद करने का अवसर था, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए नए संकल्प लेने का दिन भी रहा।
संस्थान की इन उपलब्धियों ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि पर्वतीय कृषि के क्षेत्र में शोध और नवाचार के माध्यम से न केवल किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत किया जा सकता है।




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